बच्चों में क्रेनियोफेशियल विकृतियाँ बनीं बड़ी स्वास्थ्य चुनौती, इंडो गल्फ क्रेनियोफेशियल सोसाइटी की बैठक में होगी चर्चा

Lucknow News: भारत में बच्चों के चेहरे और खोपड़ी की जन्मजात विकृतियाँ (क्रेनियोफेशियल एब्नॉर्मलिटीज) एक गंभीर स्वास्थ्य समस्या के रूप में उभर रही हैं। आंकड़ों के मुताबिक, देश में प्रति 2,000 बच्चों में से 1 बच्चा किसी न किसी क्रेनियोफेशियल विसंगति से ग्रस्त होता है। वहीं, कटे होंठ या तालु (औरॉफेशियल क्लेफ्ट) की समस्या हर 700 से 1,000 नवजात शिशुओं में पाई जाती है। इसके चलते भारत में हर साल लगभग 27,000 से 35,000 नए क्लेफ्ट रोगी सामने आ रहे हैं।

समय पर इलाज न मिलना बड़ी समस्या

देश में वर्ष 2026 की अनुमानित 1.47 अरब की आबादी के बावजूद क्रेनियोफेशियल विकृतियों का कोई आधिकारिक राष्ट्रीय महामारी-विज्ञान डेटाबेस उपलब्ध नहीं है। अधिकांश आँकड़े क्षेत्रीय अध्ययनों और अलग-अलग अस्पतालों तक सीमित हैं, जिससे ग्रामीण व पिछड़े इलाकों में पीड़ितों की वास्तविक संख्या का सटीक आकलन कठिन हो जाता है। राष्ट्रीय डेटा के अभाव और सुपर-स्पेशलाइज्ड डॉक्टरों की कमी से अनेक बच्चों को समय पर इलाज नहीं मिल पाता।

बच्चों में क्रेनियोफेशियल विकृतियाँ बनीं बड़ी स्वास्थ्य चुनौती

8 घंटे तक चलने वाली जटिल सर्जरी में लगती है विशेषज्ञों की टीम

क्रेनियोफेशियल सर्जरी पुनर्निर्माण शल्य चिकित्सा का अत्यंत जटिल और संवेदनशील हिस्सा है। इस शल्य क्रिया के दौरान दिमाग और आँखों जैसी बेहद नाज़ुक संरचनाओं के करीब खोपड़ी व चेहरे की हड्डियों को नया आकार दिया जाता है। 6 से 8 घंटे तक चलने वाली इन जटिल सर्जरीज में प्लास्टिक सर्जन, पीडियाट्रिक न्यूरोसर्जन, एनेस्थेटिस्ट और आईसीयू क्रिटिकल केयर विशेषज्ञों का एक साथ समन्वय आवश्यक होता है।

भारत में इस विषय के विशिष्ट और संरचित प्रशिक्षण के अवसर सीमित हैं। इसी कमी को दूर करने के लिए ‘इंडो गल्फ क्रेनियोफेशियल सोसाइटी’ पिछले दो दशकों से भारत और खाड़ी देशों के बीच तकनीकी व शैक्षणिक सहयोग बढ़ा रही है। इसी कड़ी में 26 सितंबर को लखनऊ के एक होटल में 5वीं इंडो गल्फ क्रेनियोफेशियल सोसाइटी बैठक तथा ‘क्रेनियल वॉल्ट रीमॉडलिंग’ पर प्रैक्टिकल मॉडल-बेस्ड हैंड्स-ऑन वर्कशॉप का आयोजन किया जा रहा है।

ओमान के अंतरराष्ट्रीय सर्जनों संग जुड़ेंगे देश के दिग्गज डॉक्टर

इस कार्यशाला का मुख्य आकर्षण जीवित मरीजों के बजाय विशेष मॉडल्स पर क्रेनियोटॉमी, बोन कटिंग, शेपिंग और फिक्सेशन का व्यावहारिक अभ्यास कराना होगा। इसमें ओमान से वरिष्ठ प्लास्टिक व क्रेनियोफेशियल सर्जन डॉ. टैमूर-अल-बुसुशी और डॉ. आदेल-अल-नगार विशेष रूप से शिरकत करेंगे। उनके साथ भारतीय संकाय के रूप में एसजीपीजीआई (SGPGI) लखनऊ के डॉ. राजीव अग्रवाल, अमृता हॉस्पिटल फरीदाबाद के डॉ. अनिल मुरारका तथा पीजीआईएमईआर चंडीगढ़ के प्रो. अतुल पराशर युवा सर्जनों को ट्रेनिंग प्रदान करेंगे।

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