बाबरी ढांचा ढहने पर रो पड़ी थीं सोनिया गांधी, बोलीं- इमरजेंसी लगाना इंदिरा गांधी की गलती थी
Sandesh Wahak Digital Desk: कांग्रेस की पूर्व अध्यक्ष सोनिया गांधी ने ‘द गार्जियन’ को दिए एक इंटरव्यू में कई संवेदनशील राजनीतिक और व्यक्तिगत मुद्दों पर खुलकर बात की है। सोनिया गांधी ने खुलासा किया कि 1992 में अयोध्या में विवादित बाबरी ढांचा गिरने की घटना को जब उन्होंने टेलीविजन पर देखा, तो वह रो पड़ी थीं। उन्होंने कहा कि उस पल उन्हें अहसास हुआ कि उन्हें उस धर्मनिरपेक्ष भारत को बचाने के लिए एक लंबी लड़ाई लड़नी होगी, जिसे महात्मा गांधी, जवाहरलाल नेहरू और उनके साथियों ने बनाया था। सोनिया गांधी ने यह भी स्वीकार किया कि भारतीय जनता पार्टी और उसकी हिंदुत्व राजनीति के उभार में कांग्रेस पार्टी की अपनी नाकामियों और लापरवाह (लेसेज-फेयर) रवैये का भी योगदान रहा।
इमरजेंसी पर परिवार में था मतभेद
इमरजेंसी (आपातकाल) के फैसले पर बोलते हुए सोनिया गांधी ने माना कि इंदिरा गांधी द्वारा इमरजेंसी लगाना एक गलती थी और उनकी सास भी इस फैसले से सहज नहीं थीं। उन्होंने बताया कि इस मुद्दे पर परिवार बंटा हुआ था; राजीव गांधी इमरजेंसी के खिलाफ थे और उन्होंने अपनी मां को अगले चुनाव तक इंतजार करने की सलाह दी थी। वहीं, संजय गांधी ने एक फैमिली डिनर के दौरान बहस करते हुए विपक्ष को रोकने के लिए दबाव बनाया था। सोनिया ने कहा कि यदि संजय गांधी को काबू में रखा जाता, तो काफी नुकसान होने से बचाया जा सकता था।
इंदिरा गांधी की हत्या का वो दर्दनाक मंजर
31 अक्टूबर 1984 को हुई इंदिरा गांधी की हत्या का जिक्र करते हुए सोनिया ने बताया कि जब उन्होंने पटाखों जैसी आवाज सुनी, तो वे दफ्तर की ओर भागीं। वहां उन्होंने अपनी सास को खून से लथपथ देखा, जिन्हें उनके ही सिख बॉडीगार्ड्स ने गोलियां मारी थीं। उन्होंने कहा कि अस्पताल तक का सफर बेहद दर्दनाक था और रास्ते में ही उन्हें अहसास हो गया था कि इंदिरा गांधी अब इस दुनिया में नहीं रहीं।
वोट बैंक के लिए सोनिया गांधी कुछ भी करेंगी: भाजपा
सोनिया गांधी के इस इंटरव्यू के बाद राजनीतिक बयानबाजी तेज हो गई है। भाजपा नेता प्रदीप भंडारी ने तंज कसते हुए कहा, सोनिया गांधी बाबरी के लिए रोईं, सोनिया गांधी बटला हाउस के लिए रोईं; सोनिया गांधी वोट बैंक के लिए कुछ भी करेंगी। कांग्रेस पार्टी हिंदुओं से नफरत करती है।

