बार-बार नमक खाने का मन और जोड़ों में दर्द? हो सकते हैं एडिसन डिजीज के संकेत

Health Tips: क्या आपको बार-बार चिप्स, नमकीन या अचार खाने की इच्छा होती है? क्या बिना किसी साफ वजह के थकान बनी रहती है या जोड़ों और मांसपेशियों में दर्द होता है? आमतौर पर लोग इन परेशानियों को सामान्य मानकर नजरअंदाज कर देते हैं। लेकिन अगर इनके साथ वजन कम होना, भूख न लगना और खड़े होते समय चक्कर आने जैसी दिक्कतें भी हों, तो इसकी एक वजह एडिसन डिजीज (Addison’s Disease) हो सकती है।

यह एक दुर्लभ हार्मोन संबंधी बीमारी है। इसमें एड्रिनल ग्रंथियां शरीर के लिए जरूरी हार्मोन पर्याप्त मात्रा में नहीं बना पातीं। इससे ब्लड प्रेशर और शरीर में नमक-पानी का संतुलन बिगड़ सकता है। हालांकि, केवल नमक खाने की इच्छा या जोड़ों में दर्द को एडिसन डिजीज का पक्का संकेत नहीं माना जा सकता।

बार-बार नमक खाने की इच्छा क्यों होती है?

कभी-कभी नमकीन चीजें खाने का मन होना सामान्य बात है। लेकिन अगर नमक खाने की इच्छा लगातार बनी रहे और इसके साथ कमजोरी, चक्कर, भूख कम लगना या वजन घटना जैसे लक्षण भी हों, तो इसकी वजह की जांच करानी चाहिए।

ब्रिटेन की स्वास्थ्य सेवा NHS के अनुसार, नमक खाने की असामान्य इच्छा एडिसन डिजीज के संभावित लक्षणों में शामिल है। इस बीमारी में एल्डोस्टेरोन हार्मोन का स्तर कम हो सकता है। यह हार्मोन किडनी को सोडियम और पानी शरीर में बनाए रखने तथा पोटैशियम को बाहर निकालने में मदद करता है।

एल्डोस्टेरोन की कमी होने पर शरीर से सोडियम ज्यादा मात्रा में निकल सकता है। इसी वजह से व्यक्ति को बार-बार नमक खाने का मन हो सकता है। हालांकि, नमक खाने की इच्छा के पीछे दूसरी वजहें भी हो सकती हैं। खानपान, ज्यादा पसीना निकलने और अन्य स्वास्थ्य समस्याओं के कारण भी ऐसा हो सकता है। इसलिए सिर्फ इस एक लक्षण के आधार पर किसी बीमारी का अंदाजा नहीं लगाना चाहिए।

एडिसन डिजीज में कौन-से हार्मोन प्रभावित होते हैं?

एड्रिनल ग्रंथियां दोनों किडनी के ऊपर मौजूद छोटी ग्रंथियां होती हैं। ये कई जरूरी हार्मोन बनाती हैं। इनमें कोर्टिसोल और एल्डोस्टेरोन प्रमुख हैं। एडिसन डिजीज को प्राइमरी एड्रेनल इनसफिशियंसी भी कहा जाता है। इसमें एड्रिनल ग्रंथियों को नुकसान पहुंचने के कारण वे पर्याप्त हार्मोन नहीं बना पातीं।

कोर्टिसोल की भूमिका: यह हार्मोन शरीर को शारीरिक तनाव से निपटने में मदद करता है। साथ ही ब्लड शुगर, मेटाबॉलिज्म और इम्यून सिस्टम की गतिविधियों को नियंत्रित करने में भी इसकी भूमिका होती है। इसकी कमी से लगातार थकान, कमजोरी और वजन कम होने जैसी समस्याएं हो सकती हैं।

एल्डोस्टेरोन की भूमिका: यह हार्मोन शरीर में सोडियम, पोटैशियम और पानी का संतुलन बनाए रखने में मदद करता है। साथ ही ब्लड प्रेशर को नियंत्रित रखने में भी इसकी अहम भूमिका है। इसकी कमी से नमक खाने की इच्छा, लो ब्लड प्रेशर और शरीर में इलेक्ट्रोलाइट का असंतुलन हो सकता है।

एंडोक्राइन सोसाइटी के अनुसार, एडिसन डिजीज की एक प्रमुख वजह ऑटोइम्यून प्रतिक्रिया है। इसमें शरीर का इम्यून सिस्टम गलती से एड्रिनल ग्रंथियों पर हमला करने लगता है। कुछ मामलों में संक्रमण या ग्रंथियों को नुकसान पहुंचाने वाली दूसरी स्थितियां भी इसकी वजह बन सकती हैं।

यह भी समझना जरूरी है कि एड्रेनल इनसफिशियंसी के हर प्रकार में दोनों हार्मोन की कमी नहीं होती। उदाहरण के लिए, सेकेंडरी एड्रेनल इनसफिशियंसी में आमतौर पर एल्डोस्टेरोन का उत्पादन बना रहता है।

एल्डोस्टेरोन कम होने से ब्लड प्रेशर पर क्या असर पड़ता है?

शरीर को सामान्य रूप से काम करने के लिए सोडियम और पानी का सही संतुलन जरूरी होता है। एल्डोस्टेरोन किडनी को सोडियम वापस शरीर में बनाए रखने और पोटैशियम को पेशाब के रास्ते बाहर निकालने में मदद करता है।

जब एडिसन डिजीज के कारण इस हार्मोन का स्तर कम हो जाता है, तो किडनी से सोडियम का नुकसान बढ़ सकता है। इसके साथ शरीर में पानी और रक्त की मात्रा भी कम हो सकती है। नतीजतन ब्लड प्रेशर गिर सकता है।

ऐसे में व्यक्ति को बैठने या लेटने के बाद खड़े होते समय चक्कर आ सकते हैं। कुछ लोगों को बहुत कमजोरी, ज्यादा प्यास या बेहोशी जैसा महसूस हो सकता है। ब्लड टेस्ट में सोडियम का स्तर कम और पोटैशियम का स्तर बढ़ा हुआ मिल सकता है। हालांकि, हर मरीज में ये बदलाव एक जैसे नहीं होते।

क्या ज्यादा नमक खाना चाहिए? इसका फैसला खुद नहीं करना चाहिए। एडिसन डिजीज से पीड़ित कुछ लोगों को डॉक्टर की सलाह पर सोडियम की मात्रा बढ़ाने की जरूरत पड़ सकती है। लेकिन नमक की सही मात्रा व्यक्ति की बीमारी, ब्लड प्रेशर, इलेक्ट्रोलाइट रिपोर्ट और चल रहे इलाज पर निर्भर करती है।

जोड़ों और मांसपेशियों में दर्द भी हो सकता है लक्षण

मायो क्लिनिक के अनुसार, एडिसन डिजीज में जोड़ों का दर्द, मांसपेशियों की कमजोरी और ऐंठन जैसी परेशानियां भी हो सकती हैं। ये लक्षण कई बार धीरे-धीरे बढ़ते हैं। शुरुआत में लोग इन्हें ज्यादा काम करने, उम्र बढ़ने, थकान या पोषण की कमी से जोड़कर देखते हैं।

कोर्टिसोल की कमी से शरीर के मेटाबॉलिज्म और तनाव से निपटने की क्षमता प्रभावित होती है। इससे लंबे समय तक थकान और मांसपेशियों में कमजोरी महसूस हो सकती है।

हालांकि, जोड़ों या मांसपेशियों में हर तरह का दर्द एडिसन डिजीज की वजह से नहीं होता। गठिया, विटामिन की कमी, संक्रमण और मांसपेशियों पर ज्यादा दबाव जैसी दूसरी स्थितियां भी इसका कारण हो सकती हैं।

नमक की क्रेविंग के साथ दिख सकते हैं ये लक्षण

क्लीवलैंड क्लिनिक के अनुसार, एडिसन डिजीज के लक्षण अक्सर धीरे-धीरे सामने आते हैं। शुरुआत में ये सामान्य स्वास्थ्य समस्याओं जैसे लग सकते हैं। इसके संभावित लक्षण हैं:

  • लगातार थकान और शरीर में ऊर्जा की कमी।
  • मांसपेशियों में कमजोरी या जोड़ों में दर्द।
  • भूख कम लगना और बिना कोशिश के वजन घटना।
  • पेट में दर्द, मतली, उल्टी या दस्त।
  • खड़े होने पर चक्कर आना या ब्लड प्रेशर कम होना।
  • नमकीन चीजें खाने की असामान्य इच्छा।
  • कुछ लोगों में चिड़चिड़ापन, उदासी या ध्यान लगाने में परेशानी।
  • त्वचा के रंग में बदलाव।

बार-बार नमक खाने का मन करना या जोड़ों और मांसपेशियों में दर्द होना कई वजहों से हो सकता है। लेकिन अगर इन परेशानियों के साथ लगातार थकान, वजन घटना, भूख कम होना, त्वचा का रंग बदलना या लो ब्लड प्रेशर जैसी दिक्कतें भी हों, तो डॉक्टर से एडिसन डिजीज की आशंका पर चर्चा करें।

यह बीमारी दुर्लभ है, लेकिन गंभीर हो सकती है। इसकी पहचान के लिए डॉक्टर ब्लड टेस्ट और जरूरत के अनुसार दूसरे परीक्षण कराते हैं। समय पर बीमारी का पता चलने और नियमित हार्मोन रिप्लेसमेंट ट्रीटमेंट से इसे नियंत्रित किया जा सकता है। खुद से नमक की मात्रा बढ़ाने या हार्मोन की दवा लेने से बचें। किसी भी तरह के इलाज के लिए विशेषज्ञ की सलाह जरूरी है।

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