4 साल में दूसरी बार टूटी शिवसेना, जानें कैसे फिर बिखर रही है ठाकरे की पार्टी
Shivsena Split 2026: महाराष्ट्र की राजनीति एक बार फिर बड़े बदलाव के दौर से गुजर रही है। ठीक चार साल पहले जून 2022 में एकनाथ शिंदे के नेतृत्व में शिवसेना में बड़ी टूट हुई थी, जिसने उद्धव ठाकरे की सरकार गिरा दी थी। अब उसी घटनाक्रम की वर्षगांठ के आसपास एक बार फिर राजनीतिक हलचल तेज हो गई है।
मिली जानकारी के अनुसार है कि उद्धव ठाकरे गुट के लोकसभा सांसदों में से छह सांसदों ने अलग समूह बनाने के लिए लोकसभा स्पीकर को पत्र सौंपा है। माना जा रहा है कि ये सांसद आगे चलकर शिंदे गुट में शामिल होकर भाजपा-एनडीए गठबंधन को समर्थन दे सकते हैं। इससे महाराष्ट्र की सियासत में फिर से बड़ा भूचाल आने के संकेत मिल रहे हैं।
जून 2026 में जब 2022 की उस बड़ी राजनीतिक घटना को चार साल पूरे हुए, उसी समय यह नई राजनीतिक हलचल सामने आई है। रिपोर्ट्स के अनुसार उद्धव ठाकरे गुट के छह सांसद पहले ही शिंदे गुट के संपर्क में थे। महाराष्ट्र के उपमुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे और उनके बेटे श्रीकांत शिंदे ने दिल्ली में बातचीत को आगे बढ़ाने में भूमिका निभाई।

सांसदों में संजय जाधव, संजय देशमुख, भाऊसाहेब वाकचौरे और अन्य नाम शामिल बताए जा रहे हैं। ये सांसद पहले ही पार्टी बैठकों और कार्यक्रमों से दूरी बनाए हुए थे।
शिंदे गुट पर उद्धव का तंज
उद्धव ठाकरे ने इस घटनाक्रम पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि शिवसेना किसी के साथ विलय के लिए नहीं बनी थी, बल्कि मराठी अस्मिता और हिंदुत्व के लिए बनी थी। उन्होंने बीजेपी पर भी तंज कसते हुए कहा कि भविष्य में शिंदे गुट और बीजेपी के बीच भी बदलाव संभव है।
वहीं संजय राउत ने इन सांसदों को ‘गद्दार’ करार दिया और कहा कि यह पूरी तरह से दल-बदल कानून के दायरे में आता है। दूसरी तरफ एकनाथ शिंदे ने उद्धव ठाकरे को चुनौती देते हुए कहा कि यह सिर्फ “ट्रेलर” है, असली कहानी अभी बाकी है।

दल-बदल कानून में उलझा मामला
संविधान के दसवीं अनुसूची (Anti-Defection Law) के अनुसार अगर किसी पार्टी के दो-तिहाई सदस्य अलग गुट में शामिल हो जाएं तो उसे कानूनी मान्यता मिल सकती है। छह में से नौ सांसदों का यह आंकड़ा इसी सीमा के करीब बताया जा रहा है।
हालांकि, कानूनी विशेषज्ञों के अनुसार यह भी स्पष्ट नहीं है कि यह नियम पूरी पार्टी पर लागू होगा या केवल सांसदों के समूह पर। इस पर अंतिम फैसला सुप्रीम कोर्ट के विचाराधीन मामलों से प्रभावित हो सकता है।
धीरे-धीरे कमजोर होती शिवसेना
2022 के बाद शिवसेना दो गुटों में बंट गई थी शिंदे गुट और उद्धव ठाकरे (UBT) गुट। लोकसभा और विधानसभा चुनावों में उद्धव गुट को लगातार नुकसान हुआ।
2024 के लोकसभा चुनाव में बेहतर प्रदर्शन के बावजूद 2026 के स्थानीय निकाय चुनावों में स्थिति और कमजोर हुई। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि यह टूट धीरे-धीरे शुरू होकर अब निर्णायक मोड़ पर पहुंचती दिख रही है।

