‘इडियट’ और ‘अंधभक्त’ टिप्पणी पर राहुल गांधी घिरे, अनुराग ठाकुर ने दिया विशेषाधिकार हनन नोटिस
Sandesh Wahak Digital Desk: लोकसभा में ‘स्टूडेंट्स, इडियट्स और अंधभक्त’ वाली टिप्पणी अब राहुल गांधी (Rahul Gandhi) के लिए नया विवाद बन गई है। बीजेपी सांसद अनुराग ठाकुर ने नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी के खिलाफ विशेषाधिकार हनन (Breach of Privilege) का नोटिस दाखिल किया है। उनका आरोप है कि राहुल गांधी ने सदन की कार्यवाही के दौरान अपमानजनक और संसदीय मर्यादा के खिलाफ भाषा का इस्तेमाल किया, जिससे सदन की गरिमा प्रभावित हुई।
हालांकि, राहुल गांधी की इस टिप्पणी के विवादित हिस्से को बाद में लोकसभा की कार्यवाही से हटा दिया गया। वहीं, राहुल गांधी का कहना था कि उन्होंने किसी सांसद या व्यक्ति का नाम लेकर यह टिप्पणी नहीं की थी, बल्कि छात्रों से हुई बातचीत का जिक्र किया था।
क्या कहा था Rahul Gandhi ने?
29 जुलाई को एंटी पेपर लीक विधेयक पर चर्चा के दौरान राहुल गांधी ने जंतर-मंतर पर एक छात्रा से हुई बातचीत का हवाला देते हुए तीन तरह के लोगों का जिक्र किया था।
उन्होंने कहा था ‘स्टूडेंट’ वह है, जो खुले मन से सच्चाई की तलाश करता है। ‘इडियट’ वह व्यक्ति है, जो खुद को सर्वज्ञ मानता है और किसी की बात नहीं सुनता। वहीं, ‘अंधभक्त’ वह है, जिसे पूरा भरोसा होता है कि वही ‘इडियट’ सही है।
इस बयान पर सत्ता पक्ष ने तत्काल आपत्ति जताई। संसदीय कार्य मंत्री किरेन रिजिजू समेत कई सांसदों ने इसे आपत्तिजनक बताया। जवाब में राहुल गांधी ने स्पष्ट किया कि उन्होंने किसी सांसद या व्यक्ति का नाम नहीं लिया, बल्कि छात्रों की कही बात को साझा किया था।
अनुराग ठाकुर ने क्या आरोप लगाए?
बीजेपी सांसद अनुराग ठाकुर ने लोकसभा अध्यक्ष को दिए नोटिस में कहा कि Rahul Gandhi की टिप्पणी संसदीय परंपराओं के अनुरूप नहीं है। उन्होंने इसे सदन और सदस्यों की गरिमा को ठेस पहुंचाने वाला बताते हुए लोकसभा के नियम 352(ii), 352(iii) और 352(vii) के उल्लंघन का आरोप लगाया है।
ठाकुर ने मांग की है कि इस मामले को विशेषाधिकार हनन के रूप में लिया जाए और नियमानुसार कार्रवाई की जाए।
क्या होता है विशेषाधिकार हनन?
संसद या विधानमंडल के किसी सदस्य अथवा सदन के अधिकारों, विशेषाधिकारों या गरिमा का उल्लंघन होने पर उसे विशेषाधिकार हनन (Breach of Privilege) कहा जाता है। यह प्रावधान संविधान के अनुच्छेद 105 (संसद) और अनुच्छेद 194 (राज्य विधानमंडल) के तहत मिलता है।
आमतौर पर विशेषाधिकार हनन के मामलों में शामिल हो सकते हैं:
- सांसद के कामकाज में बाधा पहुंचाना
- सदन या उसके सदस्यों पर झूठे या निराधार आरोप लगाना
- सदन की अवमानना करना
- सदन की कार्यवाही को गलत तरीके से प्रकाशित करना
- सदन के आदेशों की अवहेलना करना
यदि लोकसभा अध्यक्ष को प्रथम दृष्टया मामला उचित लगता है, तो उसे जांच के लिए विशेषाधिकार समिति के पास भेजा जा सकता है। समिति की रिपोर्ट के आधार पर सदन चेतावनी, फटकार, निलंबन या अन्य कार्रवाई का फैसला कर सकता है।
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