प्रतापगढ़ पहुंचीं कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष मोना, बोलीं- 2027 में बनेगी इंडिया गठबंधन की सरकार

Aradhana Mishra Mona: उत्तर प्रदेश कांग्रेस कमेटी की नवनियुक्त प्रदेश अध्यक्ष और रामपुर खास की विधायक आराधना मिश्रा ‘मोना’ के प्रतापगढ़ पहुंचने पर पार्टी कार्यकर्ताओं और समर्थकों ने जोरदार स्वागत किया। लखनऊ से प्रतापगढ़ तक रायबरेली, बछरावां, हरचंदपुर, सलोन और लालगंज समेत कई स्थानों पर मोटरसाइकिल रैलियां निकाली गईं। जगह-जगह फूल बरसाकर और माला पहनाकर उनका अभिनंदन किया गया।

2027 के विधानसभा चुनाव को लेकर कांग्रेस ने अपनी रणनीति साफ कर दी है। पार्टी की नवनियुक्त प्रदेश अध्यक्ष आराधना मिश्रा ‘मोना’ ने कहा है कि उनका प्रमुख लक्ष्य इंडिया गठबंधन को मजबूत करना और प्रदेश में गठबंधन की सरकार बनाना है। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि सरकार बनने पर गठबंधन के सभी घटक दल उसमें शामिल होंगे।

52 वर्षीय मोना ने समाजवादी पार्टी (सपा) के साथ सीटों के बंटवारे को लेकर किसी तरह की खींचतान से इनकार किया। उनका कहना है कि दोनों दलों का नेतृत्व जल्द ही इस मुद्दे पर स्थिति स्पष्ट करेगा। उन्होंने दावा किया कि कांग्रेस का जनाधार बढ़ा है और पार्टी 2027 के विधानसभा चुनाव में 2024 के लोकसभा चुनाव से बेहतर प्रदर्शन करेगी।

सपा के साथ सीट बंटवारे पर क्या बोलीं मोना?

2027 के विधानसभा चुनाव में सपा के साथ सीटों के बंटवारे को लेकर संभावित खींचतान पर आराधना मिश्रा ‘मोना’ ने कहा, “कतई कोई रस्साकशी नहीं है। इसमें कहीं कोई विषमता नहीं है और बहुत जल्द दोनों दलों का नेतृत्व आपस में स्थिति स्पष्ट कर देगा।”

2024 के लोकसभा चुनाव में कांग्रेस को गठबंधन के तहत उत्तर प्रदेश की 17 सीटें मिली थीं। इसी आधार पर सवाल पूछा गया कि क्या 2027 के विधानसभा चुनाव में कांग्रेस की दावेदारी केवल 85 सीटों तक सीमित रहेगी? इस पर मोना ने कहा, “ऐसा नहीं है कि उन सीटों के अलावा कांग्रेस कहीं और नहीं है। कांग्रेस का जनाधार बढ़ा है। फॉर्मूला तैयार करना नेतृत्व का काम है। हमें अपनी वास्तविक स्थिति से नेतृत्व को अवगत कराना है।”

उन्होंने कहा कि 2024 के लोकसभा चुनाव में जिन सीटों पर कांग्रेस ने चुनाव लड़ा, वहां पार्टी और इंडिया गठबंधन के सहयोगियों ने पूरी ईमानदारी से मेहनत की। उनके मुताबिक, गठबंधन आज भी ईमानदारी से अपने लक्ष्य की ओर बढ़ रहा है।

मोना ने सीटों के बंटवारे पर टकराव की आशंका को खारिज करते हुए कहा, “इंडिया गठबंधन उत्तर प्रदेश के लिए नहीं, पूरे देश के हित को देखकर बना है। गठबंधन की राजनीति में कभी आपको और कभी सहयोगी दल को समझौता करना पड़ता है। दोनों दलों का नेतृत्व सकारात्मक बात करता है और इसमें कहीं कोई अवरोध नहीं है।”

2024 में टूटा मोदी का अहंकार, 2027 में बेहतर प्रदर्शन का दावा

कांग्रेस को 2024 से पहले के चुनावों में अपेक्षित सफलता नहीं मिलने और पार्टी की जमीनी स्थिति पर सवाल उठने के जवाब में मोना ने संगठन के कामकाज का जिक्र किया। उन्होंने कहा कि 2019 में प्रियंका गांधी के उत्तर प्रदेश में व्यापक दौरे के बाद संगठन को मजबूत करने पर गहन काम हुआ।

उनके मुताबिक, 2022 के विधानसभा चुनाव में भले ही अच्छे नतीजे नहीं आए, लेकिन जमीनी स्तर पर संगठन की शिथिलता टूटी, कार्यकर्ता घरों से निकले और इसका असर 2024 के लोकसभा चुनाव में दिखाई दिया।

मोना ने कहा, “2024 के चुनाव में इसी उत्तर प्रदेश में मोदी का अहंकार टूटा, विजय रथ रुका और आज उनकी सरकार बैसाखी पर है।” उन्होंने दावा किया कि केंद्र सरकार नीतीश कुमार और चंद्रबाबू नायडू के समर्थन के सहारे चल रही है और इसकी सबसे बड़ी वजह उत्तर प्रदेश है। उनके अनुसार, प्रदेश में गठबंधन और कांग्रेस कार्यकर्ताओं ने भाजपा के ‘400 पार’ के नारे को रोकने में भूमिका निभाई।

कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष ने दावा किया कि उनकी पार्टी 2027 के विधानसभा चुनाव में 2024 से बेहतर प्रदर्शन करेगी और 2029 के लोकसभा चुनाव में 2027 से भी बेहतर नतीजे लाएगी।

मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को आगामी चुनावों में हराने के लक्ष्य से जुड़े सवाल पर उन्होंने कहा, “यह तो समय बताएगा, राजनीति में कोई चीज स्थायी नहीं होती और केवल विचारधारा स्थायी होती है।”

कांग्रेस के राजनीतिक सफर और प्रदेश कार्यालय में हुए हंगामे पर भी दिया जवाब

आराधना मिश्रा ‘मोना’ उत्तर प्रदेश के एक प्रमुख कांग्रेसी परिवार की चौथी पीढ़ी से आती हैं। उनका परिवार लंबे समय से कांग्रेस की विचारधारा से जुड़ा रहा है। उन्होंने अपने राजनीतिक सफर की शुरुआत ग्राम सभा सदस्य यानी ‘पंच’ के रूप में की थी।

कॉलेज की पढ़ाई पूरी करने के बाद 1999 में वह संग्रामगढ़ सहकारी संघ की अध्यक्ष बनीं। इसके बाद क्षेत्र पंचायत सदस्य और तीन बार ब्लॉक प्रमुख रहीं। 2014 के उपचुनाव में वह प्रतापगढ़ जिले की रामपुर खास विधानसभा सीट से पहली बार विधायक चुनी गईं। इसके बाद 2017 और 2022 के विधानसभा चुनावों में भी उन्होंने जीत दर्ज की। कांग्रेस ने उन्हें दो बार कांग्रेस विधानमंडल दल का नेता बनाया।

इससे पहले रामपुर खास सीट से उनके पिता प्रमोद तिवारी 1980 से 2014 तक लगातार नौ बार विधायक रहे। वह प्रदेश सरकार में मंत्री और कांग्रेस विधानमंडल दल के नेता भी रह चुके हैं। फिलहाल वह राज्यसभा में कांग्रेस के उपनेता हैं। प्रमोद तिवारी के पिता और दादा भी कांग्रेस में सक्रिय रहे थे।

मोना के प्रदेश अध्यक्ष का कार्यभार संभालने के दिन कांग्रेस कार्यालय में पूर्व प्रदेश अध्यक्ष अजय राय और कांग्रेस पार्षद ममता चौधरी के समर्थकों के बीच हुए हंगामे पर भी सवाल पूछा गया। इस पर उन्होंने कहा, “जब से नई टीम बनी है, तब से उसने एक लक्ष्य को सामने रखकर कार्य शुरू किया है। उस घटना का इस लक्ष्य से लेना-देना नहीं है।”

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