अब्बास अंसारी का ओवैसी पर तीखा हमला, बोले- गृह राज्य में नहीं चलता जादू, यूपी-बिहार में आकर मांगते हैं समर्थन

Mau News: उत्तर प्रदेश की सियासत में एक बार फिर एआईएमआईएम प्रमुख असदुद्दीन ओवैसी को लेकर राजनीतिक बयानबाजी तेज होती नजर आ रही है। मऊ सदर से विधायक अब्बास अंसारी ने ओवैसी पर तंज कसते हुए उनके राजनीतिक प्रभाव और दूसरे राज्यों में उनकी चुनावी रणनीति पर सवाल उठाए।

उन्होंने कहा कि ओवैसी अपने गृह राज्य में ही डबल डिजिट का आंकड़ा पार नहीं कर पाते हैं और वहां बनने वाली सरकारों में भी हिस्सेदारी हासिल नहीं कर पाते हैं। इसके बावजूद वह उत्तर प्रदेश, बिहार, बंगाल और महाराष्ट्र जैसे राज्यों में जाकर लोगों से समर्थन मांगते हैं। अब्बास अंसारी ने धार्मिक भावनाओं और कौम के नाम पर वोट मांगने की राजनीति पर सवाल उठाते हुए नौजवानों को सोच-समझकर फैसला लेने की नसीहत दी।

दूसरे राज्यों में सक्रियता पर उठाए सवाल

अब्बास अंसारी ने ओवैसी की राजनीति पर निशाना साधते हुए कहा कि जब कोई नेता अपने ही गृह राज्य में डबल डिजिट का आंकड़ा पार नहीं कर पाता और सरकार बनाने या उसमें हिस्सेदारी हासिल करने की स्थिति में नहीं पहुंच पाता, तो दूसरे राज्यों में उसकी राजनीतिक भूमिका पर सवाल उठना स्वाभाविक है। उन्होंने ओवैसी की दूसरे राज्यों में चुनावी सक्रियता को लेकर भी तंज कसा। उनके मुताबिक, दूसरे राज्यों में जाकर कौम, दीन-इस्लाम और हदीस की बातों के जरिए लोगों की भावनाओं को प्रभावित करके वोट हासिल करने की कोशिश करना युवाओं के हित में नहीं है।

मजहब के नाम पर भावनात्मक अपील करने का आरोप

विधायक अब्बास अंसारी ने कहा कि चुनाव के दौरान धार्मिक और सामुदायिक भावनाओं को केंद्र में रखकर वोट मांगने से युवाओं को अपने वास्तविक मुद्दों से भटकने का खतरा रहता है। उन्होंने कहा कि अगर किसी राजनीतिक अपील के प्रभाव में आकर दो-चार हजार नौजवान भी अपना वोट देते हैं, तो आगे चलकर उन्हें अपने फैसले पर पछतावा हो सकता है। अब्बास अंसारी के मुताबिक, पढ़े-लिखे और राजनीतिक परिस्थितियों को समझने वाले युवाओं को किसी भी नेता की बातों में आने के बजाय अपने भविष्य और अपने हितों को ध्यान में रखकर फैसला लेना चाहिए।

मैं ओवैसी को नसीहत नहीं दे सकता

पत्रकारों ने जब अब्बास अंसारी से पूछा कि क्या वह ओवैसी को चुनौती दे रहे हैं या उन्हें कोई सुझाव देना चाहते हैं, तो उन्होंने कहा कि वह न तो ओवैसी को नसीहत दे सकते हैं और न ही उन्हें सुझाव देने की स्थिति में हैं। उन्होंने स्पष्ट किया कि उनकी बात उन भाइयों, बुजुर्गों और साथियों के लिए है, जिनकी सोच और जिनके साथ उनका जुड़ाव है।

अब्बास अंसारी ने कहा कि कई बार राजनीतिक फैसलों के नुकसान का एहसास काफी समय बाद होता है। जब व्यक्ति पीछे मुड़कर देखता है, तो उसे लगता है कि काश उसने उस समय दूसरा फैसला लिया होता। उन्होंने इसी संदर्भ में लोगों से अपील की कि वे सभी की बातें सुनें, लेकिन समर्थन उसी को दें, जो वास्तव में उनके हितों की रक्षा कर सके।

आजमगढ़ की रैली में ओवैसी द्वारा युवाओं को भैया के लिए अपनी जवानी कुर्बान न करने और मां-बाप व पत्नी के बारे में सोचने की बात कहे जाने के सवाल पर भी अब्बास अंसारी ने प्रतिक्रिया दी। उन्होंने कहा कि यह सब कहने की बातें हैं। उनके मुताबिक, आज देश का युवा पहले से ही बेरोजगारी, आर्थिक परेशानियों और सामाजिक चुनौतियों का सामना कर रहा है।

अब्बास अंसारी ने कहा कि देश की अर्थव्यवस्था की स्थिति, नौकरियों की कमी और जाति-धर्म के आधार पर होने वाली राजनीति जैसे मुद्दों पर गंभीरता से विचार करने की जरूरत है। उन्होंने सवाल उठाया कि जब युवाओं के सामने रोजगार और भविष्य की चुनौतियां हैं, तो उनकी ऊर्जा को किन मुद्दों पर खर्च किया जाना चाहिए।

जवानी दिखानी है, तो संविधान विरोधी ताकतों से लड़ने में लगाओ

अब्बास अंसारी ने युवाओं से अपील करते हुए कहा कि अगर उन्हें अपनी ताकत और जवानी का इस्तेमाल करना है, तो उसे संविधान विरोधी और देश विरोधी ताकतों के खिलाफ खड़े होने में लगाना चाहिए। उन्होंने संविधान को देश के नागरिकों की आजादी और अधिकारों का आधार बताते हुए कहा कि इसी के जरिए लोगों को अपने धर्म का पालन करने और अपनी आस्था के अनुसार जीवन जीने की स्वतंत्रता मिलती है। उन्होंने कहा कि संविधान की रक्षा करना हर नागरिक का कर्तव्य है। युवाओं को भावनात्मक नारों और राजनीतिक बयानबाजी में उलझने के बजाय उन मुद्दों पर ध्यान देना चाहिए, जो उनके अधिकारों, रोजगार और भविष्य से जुड़े हैं।

हमारा दीन भी वफादारी सिखाता है

देश के प्रति वफादारी के सवाल पर अब्बास अंसारी ने कहा कि इस्लाम भी उस मुल्क के प्रति वफादारी की सीख देता है, जिसमें व्यक्ति रहता है। उन्होंने कहा कि देश के प्रति प्रेम और निष्ठा साबित करने के लिए किसी से प्रमाणपत्र लेने की जरूरत नहीं है। उनके मुताबिक, देश से कौन कितना प्यार करता है, यह बात किसी प्रमाणपत्र की मोहताज नहीं है। उन्होंने यह भी कहा कि किसी को देशभक्ति का प्रमाणपत्र देने या किसी से प्रमाणपत्र लेने की जरूरत नहीं होनी चाहिए। देश के प्रति जिम्मेदारी और निष्ठा व्यक्ति के आचरण से जाहिर होती है।

अपने बयान के आखिर में अब्बास अंसारी ने युवाओं और राजनीतिक रूप से जागरूक लोगों से अपील की कि वे जाति और धर्म के दायरे से ऊपर उठकर अपनी तरक्की, देश के विकास और आने वाली पीढ़ियों के भविष्य के बारे में सोचें। उन्होंने कहा कि राजनीतिक फैसले केवल भावनाओं के आधार पर नहीं, बल्कि रोजगार, शिक्षा, आर्थिक स्थिति और भविष्य की संभावनाओं को ध्यान में रखकर किए जाने चाहिए।

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