कम उम्र में भी बढ़ रहा मोतियाबिंद का खतरा, इन 6 आदतों से आंखों को रख सकते हैं सुरक्षित

Cataract symptoms: मोतियाबिंद अब केवल बढ़ती उम्र की समस्या नहीं रह गया है। विशेषज्ञों के अनुसार डायबिटीज, धूम्रपान, प्रदूषण, लंबे समय तक मोबाइल और कंप्यूटर स्क्रीन देखने तथा खराब जीवनशैली के कारण कम उम्र के लोगों में भी इसका खतरा बढ़ रहा है। इस बीमारी में आंख के प्राकृतिक लेंस में धुंधलापन आ जाता है, जिससे धीरे-धीरे देखने की क्षमता कम होने लगती है।

विशेषज्ञों का कहना है कि स्वस्थ जीवनशैली अपनाकर इसकी रफ्तार को कुछ हद तक धीमा किया जा सकता है। हालांकि मोतियाबिंद का स्थायी इलाज सर्जरी ही माना जाता है।

इन कारणों से बढ़ता है मोतियाबिंद का जोखिम

आंख का प्राकृतिक लेंस प्रोटीन और पानी से बना होता है। उम्र बढ़ने के साथ इसकी संरचना बदलने लगती है और लेंस धुंधला हो सकता है। इसके अलावा डायबिटीज, आंख में चोट, लंबे समय तक स्टेरॉयड दवाओं का सेवन, धूप की यूवी किरणों का अधिक संपर्क, धूम्रपान और आनुवंशिक कारण भी इसके जोखिम को बढ़ाते हैं।

विशेषज्ञ सलाह देते हैं कि धूप में निकलते समय UV400 सुरक्षा वाले सनग्लासेस और चौड़ी टोपी का इस्तेमाल करें। सुबह 10 बजे से शाम 4 बजे के बीच तेज धूप में आंखों की अतिरिक्त सुरक्षा जरूरी मानी जाती है।

आंखों को स्वस्थ रखने के लिए अपनाएं ये आदतें

डायबिटीज के मरीजों को ब्लड शुगर नियंत्रित रखना चाहिए, क्योंकि लगातार हाई शुगर आंखों के लेंस को नुकसान पहुंचा सकती है। भोजन में हरी पत्तेदार सब्जियां, गाजर, टमाटर, शिमला मिर्च, संतरा, अमरूद, बादाम और अखरोट जैसे एंटीऑक्सीडेंट से भरपूर खाद्य पदार्थ शामिल करें।

इसके साथ ही धूम्रपान से दूरी बनाएं, 40 वर्ष की उम्र के बाद नियमित नेत्र जांच कराएं और डॉक्टर की सलाह के बिना लंबे समय तक स्टेरॉयड दवाओं का उपयोग न करें। यदि मोतियाबिंद दैनिक जीवन को प्रभावित करने लगे, तो डॉक्टर की सलाह पर समय पर सर्जरी कराना सबसे सुरक्षित और प्रभावी उपचार माना जाता है।

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