बार-बार सांस फूलना और सीने में दर्द, CKM सिंड्रोम हो सकता है कारण, जानें बचाव के तरीके
Health Tips: आज की बदलती जीवनशैली के कारण डायबिटीज, मोटापा और हाई ब्लड प्रेशर जैसी बीमारियां तेजी से बढ़ रही हैं। नई रिसर्च के अनुसार ये समस्याएं अलग-अलग नहीं, बल्कि एक-दूसरे से जुड़ी होती हैं। इसी संबंध को समझाने के लिए अमेरिकन हार्ट एसोसिएशन (AHA) ने कार्डियोवैस्कुलर किडनी मेटाबोलिक (CKM) सिंड्रोम की अवधारणा पेश की है। इसका उद्देश्य ऐसे लोगों की समय रहते पहचान करना है, जिनमें भविष्य में हृदय, किडनी और मेटाबोलिक बीमारियों का खतरा अधिक हो सकता है।

डायबिटीज, मोटापा और हाई बीपी से कैसे जुड़ा है
AHA के अनुसार CKM कोई एक बीमारी नहीं है। इसमें मोटापा, इंसुलिन रेजिस्टेंस, डायबिटीज, हाई ब्लड प्रेशर और असामान्य कोलेस्ट्रॉल एक-दूसरे को प्रभावित करते हैं। मोटापा इंसुलिन रेजिस्टेंस बढ़ाता है, जिससे डायबिटीज का खतरा बढ़ता है। डायबिटीज किडनी को नुकसान पहुंचा सकती है, जबकि किडनी की बीमारी हाई बीपी को बढ़ाती है। इसके बाद हाई बीपी और किडनी की समस्या मिलकर हृदय पर अतिरिक्त दबाव डालती हैं।

क्लीवलैंड क्लीनिक के मुताबिक शुरुआती चरण में इसके स्पष्ट लक्षण नहीं दिखते। लेकिन सांस फूलना, सीने में दर्द या दबाव, जल्दी थकान, पैरों में सूजन, रात में सांस लेने में परेशानी, अचानक वजन बढ़ना और अनियमित धड़कन जैसे संकेत दिखाई दें तो इन्हें नजरअंदाज नहीं करना चाहिए। ये हार्ट फेल्योर, कोरोनरी आर्टरी डिजीज या किडनी की बीमारी का संकेत भी हो सकते हैं।
ऐसे करें बचाव
नेशनल किडनी फाउंडेशन के अनुसार वजन नियंत्रित रखना, सप्ताह में कम से कम 150 मिनट व्यायाम, नमक और प्रोसेस्ड फूड कम खाना, फल-सब्जियां और साबुत अनाज अधिक लेना, धूम्रपान व तंबाकू से दूरी, सीमित शराब सेवन और ब्लड प्रेशर, ब्लड शुगर व कोलेस्ट्रॉल की नियमित जांच CKM सिंड्रोम के खतरे को कम कर सकती है। विशेषज्ञों का कहना है कि समय पर पहचान, स्वस्थ जीवनशैली और डॉक्टर की सलाह के अनुसार इलाज से गंभीर जटिलताओं से काफी हद तक बचा जा सकता है।
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