वोट चोरी के आरोपों पर घिरी ECI, ममता ने CEC की गिरफ्तारी और बंगाल में री-पोल की मांग की
ECI SIR Row: पश्चिम बंगाल में 2026 विधानसभा चुनाव और मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) को लेकर राजनीतिक विवाद तेज हो गया है। तृणमूल कांग्रेस (TMC) प्रमुख ममता बनर्जी ने मुख्य चुनाव आयुक्त (CEC) ज्ञानेश कुमार पर गंभीर आरोप लगाते हुए उनकी गिरफ्तारी और पश्चिम बंगाल में दोबारा चुनाव कराने की मांग की है। यह बयान ऐसे समय आया है जब चुनाव आयोग के भीतर SIR से जुड़े फैसलों को लेकर दो चुनाव आयुक्तों की आपत्तियों की रिपोर्ट सामने आई है।
ममता बनर्जी ने आरोप लगाया कि ज्ञानेश कुमार की निगरानी में हुए चुनाव और SIR प्रक्रिया में गड़बड़ी हुई। उन्होंने चुनाव को वापस कराने की मांग करते हुए BJP और CEC पर मिलीभगत का आरोप लगाया। ये उनके राजनीतिक आरोप हैं, जिन्हें चुनाव आयोग ने स्वीकार नहीं किया है।
रिपोर्ट में क्या सामने आया?
- इंडियन एक्सप्रेस की रिपोर्ट के मुताबिक, चुनाव आयुक्त सुखबीर सिंह संधू और विवेक जोशी ने पिछले 10 महीनों में SIR से जुड़े फैसलों पर कम से कम 14 औपचारिक आपत्तियां दर्ज कीं।
- इन आपत्तियों में नए मतदाताओं के पंजीकरण, मतदाताओं के नाम हटाने, चुनावी डेटा और SIR से जुड़े फैसलों पर सवाल उठाए गए।
- रिपोर्ट के मुताबिक, दोनों आयुक्तों ने कुछ कदमों को “अनधिकृत” और “गैरकानूनी” बताते हुए आपत्ति दर्ज की।
हालांकि, चुनाव आयोग ने अंदरूनी मतभेद की बात खारिज की है। ECI के सूत्रों के मुताबिक, दोनों चुनाव आयुक्तों की टिप्पणियों पर आयोग ने विचार और जांच की थी। आयोग ने SIR से जुड़े फैसलों को सर्वसम्मति से लिए जाने की बात भी कही है।
राहुल, अखिलेश और तेजस्वी भी हमलावर
कांग्रेस नेता राहुल गांधी ने SIR को लेकर चुनाव आयोग, BJP और RSS पर ‘वोट चोरी’ में शामिल होने का आरोप लगाया और इसे संविधान पर हमला बताया। वहीं समाजवादी पार्टी प्रमुख अखिलेश यादव ने चुनाव आयोग के भीतर कथित मतभेदों को लोकतंत्र के लिए गंभीर स्थिति बताया।
RJD नेता तेजस्वी यादव ने भी बिहार और पश्चिम बंगाल में दोबारा चुनाव कराने की मांग की और चुनाव प्रक्रिया में गड़बड़ी का आरोप लगाया। आम आदमी पार्टी ने भी CEC ज्ञानेश कुमार के खिलाफ कार्रवाई और SIR को रद्द करने की मांग की है।
विवाद के बीच रिपोर्ट में यह भी सामने आया है कि पश्चिम बंगाल में SIR के तहत बड़ी संख्या में मतदाताओं के नाम और अपील से जुड़े मामले अदालतों तक पहुंचे हैं। ऐसे में अब राजनीतिक दलों के आरोपों के साथ-साथ चुनाव आयोग की प्रक्रिया और उसके भीतर दर्ज आपत्तियों पर भी बहस तेज हो गई है।
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