बार-बार सिरदर्द और धुंधला दिखना मामूली नहीं, चश्मे का नंबर बदलने पर मिलते हैं ये संकेत
Eye Health: आंखों की रोशनी में बदलाव हमेशा अचानक नहीं होता। कई बार पुराने चश्मे के बावजूद साफ दिखाई न देना, पढ़ते समय सिरदर्द होना या मोबाइल-कंप्यूटर चलाने के बाद आंखों में भारीपन महसूस होना चश्मे का नंबर बदलने का संकेत हो सकता है। विशेषज्ञों के अनुसार नियमित आंखों की जांच केवल चश्मे का नंबर पता करने के लिए नहीं, बल्कि मोतियाबिंद, ग्लूकोमा और डायबिटिक रेटिनोपैथी जैसी बीमारियों की पहचान के लिए भी जरूरी है।
अमेरिकन एकेडमी ऑफ ऑप्थेमोलॉजी के अनुसार, 18 से 64 साल के स्वस्थ लोगों को 1-2 साल में आंखों की जांच करानी चाहिए। 40 साल के बाद सालाना जांच की सलाह दी जाती है। डायबिटीज, हाई ब्लड प्रेशर या ग्लूकोमा की पारिवारिक हिस्ट्री होने पर जांच ज्यादा बार करानी पड़ सकती है।

इन संकेतों को न करें नजरअंदाज
धुंधला दिखना: दूर या पास की चीजें साफ न दिखना, किताब पढ़ने या बोर्ड देखने में परेशानी होना नंबर बदलने का संकेत हो सकता है। हालांकि इसकी वजह ड्राई आई, मोतियाबिंद या रेटिना की समस्या भी हो सकती है।
बार-बार आंखें सिकोड़ना: टीवी, मोबाइल या सड़क के साइन पढ़ते समय आंखें सिकोड़कर देखने की आदत बढ़ रही है तो नजर की जांच कराएं।
सिरदर्द और आंखों में थकान: गलत नंबर के चश्मे से आंखों पर ज्यादा जोर पड़ सकता है, जिससे सिरदर्द और तनाव महसूस हो सकता है।

रात में ड्राइविंग में परेशानी भी संकेत
स्क्रीन देखने के बाद जलन, दर्द या भारीपन और रात में गाड़ियों की हेडलाइट ज्यादा चुभना भी नजर में बदलाव का संकेत हो सकता है। ऐसे लक्षण लगातार बने रहें तो केवल नया चश्मा बनवाने के बजाय नेत्र विशेषज्ञ से आंखों की पूरी जांच कराना बेहतर है।

