BIS सर्टिफिकेट अनिवार्य करने के विरोध में फर्नीचर कारोबारियों का हल्लाबोल
Sandesh Wahak Digital Desk : उत्तर प्रदेश के फर्नीचर व्यापारियों और निर्माताओं ने केंद्र सरकार की ओर से फर्नीचर पर BIS सर्टिफिकेट और ISI मार्क अनिवार्य किए जाने का विरोध किया है। फर्नीचर ट्रेडर्स वेलफेयर एसोसिएशन, उत्तर प्रदेश की प्रदेश अध्यक्ष इकबाल हसन की अध्यक्षता में हुई आपात बैठक में पदाधिकारियों ने इस आदेश को लेकर अपनी आपत्तियां सामने रखीं।
एसोसिएशन का कहना है कि सरकार का उद्देश्य उपभोक्ताओं को बेहतर गुणवत्ता का सामान उपलब्ध कराना और घटिया विदेशी आयात पर रोक लगाना है, जो स्वागत योग्य है। हालांकि, उनका दावा है कि मौजूदा नियमों का सबसे ज्यादा असर छोटे वर्कशॉप, स्थानीय कारपेंटर और सूक्ष्म फर्नीचर कारोबारियों पर पड़ेगा।
छोटे कारोबारियों पर बढ़ेगा आर्थिक बोझ
प्रदेश उपाध्यक्ष राधेश्याम शर्मा ने कहा कि BIS लाइसेंस के लिए फैक्ट्री ऑडिट और उत्पादों की लैब टेस्टिंग जैसी प्रक्रियाएं छोटे निर्माताओं के लिए महंगी हैं। वहीं, प्रदेश कोषाध्यक्ष सोनू अग्रवाल ने दावा किया कि निर्धारित मानकों के मुताबिक मानकीकृत कच्चा माल इस्तेमाल करने से छोटे कारोबारियों की उत्पादन लागत में 15 से 25 फीसदी तक बढ़ोतरी हो सकती है।
एसोसिएशन के पदाधिकारियों का कहना है कि एक-दो कमरों की छोटी वर्कशॉप में इन-हाउस टेस्टिंग के लिए जरूरी उपकरण लगाना व्यावहारिक नहीं है। ग्रामीण और छोटे शहरों में मानकीकृत प्लाईवुड, हार्डवेयर और ग्लू की उपलब्धता को लेकर भी कारोबारियों ने चिंता जताई है।

कागजी कार्रवाई और पुराने स्टॉक को लेकर भी चिंता
प्रदेश वरिष्ठ महामंत्री नसीम अंसारी ने कहा कि डिजिटल फॉर्म, ऑडिट और सेल्फ-डिक्लेरेशन जैसी प्रक्रियाएं छोटे और कम पढ़े-लिखे कारीगरों के लिए मुश्किल हो सकती हैं। उनका कहना है कि इससे कारोबारियों को महंगे निजी कंसल्टेंट पर निर्भर होना पड़ सकता है।
वहीं, प्रदेश महामंत्री अहमद अतरी ने पुराने स्टॉक को लेकर चिंता जताई। एसोसिएशन के मुताबिक, बिना BIS वाले पुराने फर्नीचर को बाजार में निकालने के लिए समय मिलने के बावजूद ग्राहक ऐसे सामान को खरीदने से बच रहे हैं या ज्यादा छूट मांग रहे हैं। कारोबारियों का कहना है कि इससे छोटे रिटेलर्स और स्थानीय कारीगरों की सप्लाई चेन प्रभावित हो सकती है।
एसोसिएशन ने यह भी कहा कि बड़े कारोबारी BIS की प्रक्रिया को आसानी से पूरा कर सकते हैं, जबकि अलग-अलग डिजाइन के कस्टम-मेड फर्नीचर बनाने वाले छोटे कारीगरों के लिए हर नए डिजाइन की टेस्टिंग कराना मुश्किल होगा।
सरकार से छूट और राहत की मांग
फर्नीचर ट्रेडर्स वेलफेयर एसोसिएशन ने केंद्र और उत्तर प्रदेश सरकार से सूक्ष्म और असंगठित इकाइयों को BIS नियमों से छूट देने या इन नियमों को केवल बड़े उद्योगों तक सीमित रखने की मांग की है।
इसके अलावा एसोसिएशन ने छोटे उद्योगों के लिए लाइसेंसिंग और टेस्टिंग फीस पर 90 फीसदी तक सब्सिडी, जिला और क्लस्टर स्तर पर सरकारी टेस्टिंग लैब स्थापित करने, अनुपालन के लिए अतिरिक्त समय देने और कस्टम/ऑर्डर-बेस्ड फर्नीचर को नियमों से बाहर रखने की मांग की है।
प्रदेश अध्यक्ष इकबाल हसन ने कहा कि बिना ISI मार्क के अधिसूचित श्रेणी का फर्नीचर बेचने या स्टॉक करने पर भारी जुर्माना, सामान जब्त करने और कानूनी कार्रवाई का प्रावधान कारोबारियों के लिए उचित नहीं है। उन्होंने कहा कि “व्यापारी चोर नहीं है” और इस आदेश को वापस लिया जाना चाहिए।
एसोसिएशन ने UPI लेवी 0.4 फीसदी को लेकर भी आपत्ति जताई और कहा कि फर्नीचर कारोबारियों पर पहले से GST, आयकर और स्थानीय निकायों के विभिन्न कर लागू हैं। एसोसिएशन ने चेतावनी दी कि अगर सरकार ने छोटे व्यापारियों और कारीगरों की समस्याओं पर जल्द ध्यान नहीं दिया, तो प्रदेशभर के फर्नीचर व्यापारी और कारपेंटर आंदोलन करने को मजबूर होंगे।

