JDU ने अपने ही सांसद पर कसा शिकंजा, सदस्यता खत्म करने की मांग

Sandesh Wahak Digital Desk: बिहार की सियासत में हलचल तेज हो गई है। सत्तारूढ़ जनता दल यूनाइटेड (JDU) ने अपने ही सांसद की लोकसभा सदस्यता समाप्त करने की मांग को लेकर स्पीकर को नोटिस दिया है। पार्टी सूत्रों के अनुसार, लोकसभा में जेडीयू के नेता दिलेश्वर कामैत ने स्पीकर ओम बिरला को नोटिस सौंपा है, जिसमें बांका से सांसद गिरधारी यादव को कथित पार्टी विरोधी गतिविधियों के आधार पर अयोग्य ठहराने की मांग की गई है।

पार्टी विरोधी गतिविधियों के आरोप

जेडीयू की ओर से भेजे गए पत्र में गिरधारी यादव पर पार्टी लाइन के खिलाफ काम करने और लगातार अनुशासनहीनता के आरोप लगाए गए हैं। पार्टी ने अपने दावे के समर्थन में दस्तावेज भी सौंपे हैं। आरोप है कि वह लंबे समय से पार्टी के आधिकारिक रुख से अलग चलते रहे हैं और इससे संगठन की छवि को नुकसान पहुंचा है।
मामले को और गंभीर बनाते हुए यह भी सामने आया है कि पिछले साल बिहार विधानसभा चुनाव में गिरधारी यादव के बेटे ने विपक्षी दल राष्ट्रीय जनता दल के टिकट पर चुनाव लड़ा था। इतना ही नहीं, गिरधारी यादव ने अपने बेटे के लिए प्रचार भी किया था, जिसे पार्टी ने गंभीर अनुशासनहीनता माना है।

EVM पर बयान से बढ़ा विवाद

गिरधारी यादव पहले भी विवादों में रह चुके हैं। पिछले साल जुलाई में जेडीयू ने उन्हें इलेक्ट्रॉनिक वोटिंग मशीनों के खिलाफ सार्वजनिक बयान देने पर कारण बताओ नोटिस जारी किया था। पार्टी का कहना था कि उनका यह बयान जेडीयू के आधिकारिक रुख के खिलाफ था और इससे पार्टी को सार्वजनिक रूप से शर्मिंदगी उठानी पड़ी।
पार्टी द्वारा भेजे गए नोटिस में साफ कहा गया है कि जेडीयू लगातार चुनाव आयोग और EVM के इस्तेमाल का समर्थन करती रही है, चाहे वह विपक्षी गठबंधन ‘INDIA’ का हिस्सा रही हो या वर्तमान में राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन का। ऐसे में चुनावी साल में गिरधारी यादव की टिप्पणियां न केवल पार्टी को शर्मिंदा करती हैं, बल्कि विपक्ष के आरोपों को भी मजबूती देती हैं। पार्टी ने उनके आचरण को अनुशासनहीनता करार देते हुए इसे अपने घोषित रुख के विपरीत बताया है।

नीतीश कुमार फिर बने JDU के अध्यक्ष

इस बीच पार्टी संगठन में एक और बड़ा फैसला सामने आया है। नीतीश कुमार को सर्वसम्मति से एक बार फिर जेडीयू का राष्ट्रीय अध्यक्ष चुन लिया गया है। राजधानी दिल्ली में हुई प्रक्रिया के दौरान यह तय हुआ कि इस पद के लिए कोई अन्य उम्मीदवार मैदान में नहीं था।
वहीं जेडीयू नेता अनिल हेगड़े ने प्रेस कॉन्फ्रेंस में जानकारी देते हुए बताया कि नामांकन दाखिल करने की अंतिम तिथि 22 मार्च थी। इसके बाद 23 मार्च को नामांकन की जांच की गई और 24 मार्च की सुबह 11 बजे तक नाम वापस लेने का समय दिया गया। इस पूरी प्रक्रिया में केवल एक ही नामांकन दाखिल हुआ, जो नीतीश कुमार का था, जिसके चलते उन्हें फिर से अध्यक्ष घोषित किया गया।

बिहार की राजनीति में बढ़ी हलचल

वहीं JDU द्वारा अपने ही सांसद के खिलाफ उठाया गया यह कदम बिहार की राजनीति में नई हलचल पैदा कर रहा है। एक तरफ पार्टी अनुशासन को सख्ती से लागू करने का संदेश दे रही है, वहीं दूसरी ओर इस घटनाक्रम ने राज्य के राजनीतिक माहौल को और गरमा दिया है।

 

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