यूपी एमएलसी चुनाव की उल्टी गिनती शुरू, जानें कैसे होता है चुनाव और क्या मिलती हैं सुविधाएं

Lucknow News: उत्तर प्रदेश के उच्च सदन यानी विधान परिषद की खाली हो रही 11 सीटों के लिए निर्वाचन आयोग ने बिगुल फूंक दिया है। आगामी 23 अक्टूबर को इसके लिए मतदान कराया जाएगा। 100 सदस्यों की क्षमता वाली यूपी विधान परिषद का चुनावी ढांचा सामान्य विधानसभा चुनाव से पूरी तरह अलग है। जहां विधायकों का चुनाव सीधे जनता करती है, वहीं एमएलसी (विधान परिषद सदस्य) का चुनाव अप्रत्यक्ष वोटिंग प्रणाली से होता है।

कैसे चुना जाता है एमएलसी

विधान परिषद सदस्यों का कार्यकाल 6 वर्षों का होता है और चुनाव लड़ने के लिए न्यूनतम आयु 30 वर्ष तय की गई है।

38 सदस्य (1/3): राज्य के विधानसभा सदस्यों (विधायकों) द्वारा चुने जाते हैं।

36 सदस्य (1/3): नगर निगम, नगरपालिका, जिला पंचायत व क्षेत्र पंचायत के जनप्रतिनिधियों द्वारा चुने जाते हैं।

8 सदस्य (1/12): पंजीकृत स्नातकों (ग्रेजुएट) द्वारा चुने जाते हैं।

8 सदस्य (1/12): शिक्षकों द्वारा चुने जाते हैं।

10 सदस्य: राज्यपाल द्वारा राज्य के विशिष्ट गुणीजनों में से मनोनीत किए जाते हैं।

एमएलसी को कितना मिलता है वेतन और सुविधाएं

विधानसभा में पारित संशोधन विधेयक के बाद अब एमएलसी का मासिक वेतन व भत्ता 2.66 लाख रुपये प्रति माह बैठता है।

मूल वेतन: 35,000 रुपये

चिकित्सा भत्ता: 45,000 रुपये

क्षेत्रीय भत्ता: 75,000 रुपये

स्टेशनरी व सचिव भत्ता: स्टेशनरी के लिए 10,000 रुपये और सचिव के लिए 30,000 रुपये मासिक।

दैनिक भत्ता: सत्र या बैठक के दौरान 2,500 रुपये प्रतिदिन, जबकि सामान्य दिनों में 2,000 रुपये प्रतिदिन।

यात्रा और अन्य भत्ते

सफर का खर्च: राज्य में ₹20/किमी और राज्य से बाहर ₹25/किमी।

मुफ्त बिजली व यात्रा: हर महीने 2,000 यूनिट मुफ्त बिजली, तथा साल में 5 लाख रुपये तक के एयर या रेल कूपन (सह-यात्री का किराया शामिल)।

संचार भत्ता: फोन/मोबाइल बिल के लिए सालाना 1 लाख रुपये।

क्षेत्र विकास के लिए 5 करोड़ रुपये का सालाना बजट

हर विधान परिषद सदस्य को अपने क्षेत्र में बुनियादी ढांचे और विकास कार्यों को अंजाम देने के लिए 5 करोड़ रुपये प्रति वर्ष की विधायक निधि मिलती है। इसके अतिरिक्त कैशलेस इलाज, सरकारी आवास या मकान किराया भत्ता भी प्रदान किया जाता है।

देश के केवल 6 राज्यों में है उच्च सदन

भारत में केवल उत्तर प्रदेश, बिहार, महाराष्ट्र, तेलंगाना, आंध्र प्रदेश और कर्नाटक में ही द्विसदनीय व्यवस्था (विधान परिषद) लागू है। नियमों के मुताबिक, विधान परिषद में न्यूनतम 40 और अधिकतम विधानसभा की कुल सीटों का एक-तिहाई (यूपी में अधिकतम 134) सदस्य हो सकते हैं। 403 विधानसभा सीटों वाले यूपी में 1982 के बाद साल 2022 में पहली बार सत्तारूढ़ बीजेपी को विधान परिषद में स्पष्ट बहुमत प्राप्त हुआ था।

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