Lucknow News: मदरसों से निकलेगा जागरूक नागरिक, शुरू हुई संवैधानिक शिक्षा की पहल
अच्छा मुसलमान ही नहीं, अच्छा नागरिक बनाना भी मकसद- मौलाना काब रशीदी
Sandesh Wahak Digital Desk: बदलते समय के साथ मदरसों की शिक्षा व्यवस्था को आधुनिक और समाजोपयोगी बनाने की दिशा में एक अहम कदम उठाया गया है।
अब मदरसों में धार्मिक शिक्षा के साथ-साथ भारत के संविधान, कानूनी अधिकारों और नागरिक कर्तव्यों की भी पढ़ाई कराई जाएगी।
इस पहल का उद्देश्य मदरसों में अध्ययनरत छात्र-छात्राओं को देश की मुख्यधारा से जोड़ते हुए उन्हें जागरूक और जिम्मेदार नागरिक बनाना है।
यह जानकारी जमीयत उलेमा-ए-हिंद उत्तर प्रदेश (लखनऊ) के विधिक सलाहकार मौलाना काब रशीदी ने संविधान और विभिन्न कानूनों की मूलभूत जानकारी पर आधारित अपनी पुस्तक के विमोचन के अवसर पर दी।
उन्होंने कहा कि मदरसों की शिक्षा केवल धार्मिक ज्ञान तक सीमित नहीं है, बल्कि यहां विद्यार्थियों के व्यक्तित्व निर्माण और सामाजिक जिम्मेदारियों पर भी विशेष ध्यान दिया जाता है।
मौलाना काब रशीदी ने कहा कि समय के साथ चलना हर संस्था और समाज की जरूरत है। ऐसे में मदरसों में संवैधानिक और कानूनी शिक्षा की शुरुआत छात्रों को उनके अधिकारों और कर्तव्यों के प्रति जागरूक बनाएगी।
इस पुस्तक के माध्यम से विद्यार्थियों को संविधान की बुनियादी समझ मिलेगी, जिससे वे लोकतांत्रिक मूल्यों को बेहतर ढंग से समझ सकेंगे।
समाज के सहयोग से चलते हैं मदरसे
उन्होंने कहा कि मदरसों का संचालन किसी बड़े उद्योगपति या पूंजीपति के सहयोग से नहीं, बल्कि समाज के साधारण और जरूरतमंद वर्ग के सहयोग से होता है।
आज़ादी से लेकर सामाजिक और नैतिक जागरूकता तक, मदरसों ने देश के निर्माण में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है।
सुधार की सकारात्मक पहल
मौलाना काब रशीदी ने बताया कि यह पुस्तक जल्द ही भारत की 10 अन्य भाषाओं में प्रकाशित की जाएगी और 15 राज्यों में इसका विमोचन किया जाएगा।
उन्होंने इसे मदरसों में “सकारात्मक सुधार” की शुरुआत बताते हुए कहा कि सुधार ऐसे होने चाहिए, जिससे मदरसों की परंपरा और पहचान सुरक्षित रहे, साथ ही आधुनिक जरूरतों के अनुरूप शिक्षा व्यवस्था भी मजबूत हो।
धार्मिक शिक्षा के साथ संविधान और कानूनी जागरूकता को जोड़ने की यह पहल न केवल मदरसों के छात्रों को नई दिशा देगी, बल्कि उन्हें अधिकारों, कर्तव्यों और लोकतांत्रिक मूल्यों से भी जोड़ने का कार्य करेगी।
इसे समाज में सकारात्मक बदलाव और राष्ट्रीय एकता की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।

