प्रह्लाद जोशी ने संभाला शिक्षा मंत्रालय का पदभार, अधिकारियों के साथ की बैठक
Sandesh Wahak Digital Desk: छात्रों और विपक्षी दलों के 36 दिनों तक चले भारी विरोध-प्रदर्शन के बाद आखिरकार धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे के बाद प्रह्लाद जोशी को देश का नया शिक्षा मंत्री बनाया गया है। रविवार को उन्होंने औपचारिक रूप से शिक्षा मंत्रालय का पदभार संभाल लिया और अधिकारियों के साथ प्राथमिकताएं तय करने के लिए एक संक्षिप्त बैठक की। जोशी अपने मौजूदा नवीन और नवीकरणीय ऊर्जा मंत्रालय के साथ-साथ शिक्षा मंत्रालय की जिम्मेदारी भी संभालेंगे।
कर्नाटक के धारवाड़ जिले से अपनी राजनीति की शुरुआत करने वाले प्रह्लाद जोशी को भारतीय जनता पार्टी में एक बेहद अनुभवी और रणनीतिक नेता माना जाता है। लंबे समय तक राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) से जुड़े रहने के कारण संगठन पर उनकी मजबूत पकड़ है। वे साल 2004 से लगातार 5 बार धारवाड़ से चुनाव जीतकर लोकसभा पहुंचे हैं और पिछले 22 वर्षों से सांसद के रूप में सक्रिय भूमिका निभा रहे हैं।
संगठन और सरकार में निभाई हैं अहम जिम्मेदारियां
प्रह्लाद जोशी 2012 में कर्नाटक भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष रह चुके हैं। 2014 के बाद उन्होंने संसद की कई महत्वपूर्ण समितियों की अध्यक्षता की। मोदी सरकार के दूसरे कार्यकाल (2019) में उन्होंने संसदीय कार्य, कोयला और खनन जैसे महत्वपूर्ण मंत्रालयों की कमान संभाली थी। वहीं, 2024 में मोदी 3.0 सरकार के गठन के बाद उन्हें उपभोक्ता मामले, खाद्य एवं सार्वजनिक वितरण तथा नवीन और नवीकरणीय ऊर्जा मंत्रालय सौंपा गया था।
पेपर लीक रोकना और NEET-UG में बड़े बदलाव की चुनौती
नए शिक्षा मंत्री के रूप में प्रह्लाद जोशी के सामने चुनौतियों का बड़ा पहाड़ है। नीट पेपर लीक मामले के बाद छात्रों का भरोसा फिर से कायम करना, नई शिक्षा नीति (NEP) को प्रभावी ढंग से लागू करना और CBSE तथा NCERT के पाठ्यक्रम में आवश्यक सुधार करना उनकी प्राथमिकता होगी। सूत्रों और मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, NEET-UG परीक्षा के स्वरूप में बड़े बदलाव की तैयारी की जा रही है। संभावना है कि अगले साल से NEET परीक्षा कंप्यूटर आधारित (CBT Mode) हो सकती है और इसे दो चरणों में आयोजित किया जा सकता है। इसके अलावा, नेशनल टेस्टिंग एजेंसी (NTA) के प्रशासनिक ढांचे में भी बड़े स्तर पर फेरबदल की योजना है ताकि भविष्य में किसी भी तरह की धांधली की गुंजाइश न रहे।

