सड़क बदहाल, विभाग पैचिंग में व्यस्त, हाईकोर्ट ने प्रमुख सचिव को किया तलब, पूछा- कब मिलेगी वित्तीय मंजूरी?
Balrampur News: करीब पांच लाख आबादी और नेपाल सीमा से लगे 70 थारू बाहुल्य गांवों की जीवनरेखा माने जाने वाले उतरौला-पचपेड़वा-चंदनपुर मार्ग की बदहाली पर इलाहाबाद हाईकोर्ट की लखनऊ पीठ ने कड़ा रुख अपनाया है। गड्ढों, कीचड़ और जलभराव से कराह रही 21 किलोमीटर लंबी इस सड़क पर लोक निर्माण विभाग (पीडब्ल्यूडी) द्वारा स्थायी समाधान के बजाय मात्र पैचवर्क कराने की कार्यशैली पर अदालत ने गहरी नाराजगी जताई है। मामले की गंभीरता को देखते हुए कोर्ट ने पीडब्ल्यूडी के अपर मुख्य सचिव अथवा प्रमुख सचिव को 7 सितंबर को वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए व्यक्तिगत रूप से पेश होने और वित्तीय स्वीकृति में लगने वाले समय की स्थिति स्पष्ट करने का आदेश दिया है।
यह पूरा मामला सामाजिक कार्यकर्ता महेंद्र कुमार त्रिपाठी द्वारा उत्तर प्रदेश सरकार व अन्य के खिलाफ दाखिल जनहित याचिका (संख्या 867/2025) पर सुनवाई के दौरान सामने आया। इससे पहले 14 जनवरी 2026 को न्यायमूर्ति राजन रॉय और न्यायमूर्ति अवधेश कुमार चौधरी की पीठ ने अपेक्षित शपथपत्र दाखिल न किए जाने पर नाराजगी जताई थी और अधिशासी अभियंता (प्रांतीय खंड, पीडब्ल्यूडी) को तलब किया था। इसके बाद 28 जनवरी की सुनवाई के दौरान जब विभाग ने सड़क के कुछ हिस्सों में केवल पैचिंग कराने की बात कही, तो अदालत ने तीखा सवाल किया कि इतने लंबे और आवागमन के अयोग्य मार्ग पर केवल पैचवर्क से काम क्यों चलाया जा रहा है। कोर्ट ने स्पष्ट निर्देश दिया था कि मुख्य अभियंता मौके का मुआयना कर तस्वीरों सहित रिपोर्ट दें कि मार्ग चलने लायक है या इसे बड़े पैमाने पर मरम्मत अथवा पुनर्निर्माण की दरकार है।

हाल ही में 10 अगस्त 2026 को न्यायमूर्ति राजन रॉय और न्यायमूर्ति मंजीव शुक्ला की पीठ के समक्ष मुख्य अभियंता (देवीपाटन क्षेत्र, गोंडा) की 13 फरवरी की रिपोर्ट पेश की गई। रिपोर्ट से यह बात सामने आई कि सड़क निर्माण और मरम्मत के लिए वित्तीय स्वीकृति का प्रस्ताव 19 दिसंबर 2025 को ही शासन को भेज दिया गया था, मगर महीनों बीत जाने के बाद भी मंजूरी नहीं मिल सकी। इस पर अदालत ने विभाग के शीर्ष नेतृत्व को तलब करते हुए मामले की अगली सुनवाई 7 सितंबर तय की है।
गौरतलब है कि हिमालय की तलहटी में स्थित होने के कारण यह सड़क हर साल बाढ़ की विभीषिका झेलती है। वर्तमान में तीन मीटर चौड़ी इस एमडीआर श्रेणी की सड़क को सात मीटर चौड़ा करने की योजना है। पूर्व विधायक शैलेश कुमार सिंह ‘शैलू’ के समर्थकों द्वारा सोशल मीडिया व अन्य जगहों पर यह बात वायरल की जा रही है कि उनके अथक प्रयास के द्वारा इस सड़क का पुनर्निर्माण करवाया जा रहा है या इसका पैच वर्क करवाया जा रहा है। फिलहाल, हाईकोर्ट के आदेश और उसकी सख्ती के सामने आने के बाद उन तमाम बातों पर विराम लग सकता है। जो लोग यह कह रहे हैं कि हमारे अपने-अपने नेताओं की वजह से इस सड़क का निर्माण हो रहा है। सूत्रों के अनुसार; अंदरखाने में यह भी चर्चा है कि मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की नाराजगी की वजह से ही पिछले 10 वर्षों से इस सड़क का निर्माण, उच्चीकरण नहीं हो पा रहा है।

वहीं, पूर्व विधायक शैलेश कुमार सिंह ‘शैलू’ द्वारा 29 जुलाई को मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ को लिखे पत्र के बाद विभाग ने 21.15 किलोमीटर मार्ग पर 78.08 लाख रुपये की लागत से पैचिंग का काम शुरू कराया है, जिसके तहत 8.30 किमी के लिए 38.74 लाख और 12.85 किमी के लिए 39.34 लाख रुपये खर्च किए जा रहे हैं। हालांकि, क्षेत्रवासियों की मांग है कि पैचिंग के अस्थायी लेप के बजाय सड़क का उच्चीकरण और स्थायी चौड़ीकरण जल्द से जल्द पूरा किया जाए। अब देखना होगा कि हाईकोर्ट की सख्ती के बाद लोक निर्माण विभाग उत्तर प्रदेश कब जागता है और चंदनपुर-उतरौला मार्ग के उच्चीकरण को कब तक मंजूरी देने का काम करता है?
-योगेंद्र त्रिपाठी
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