13 साल से कम उम्र के बच्चों पर सोशल मीडिया की पाबंदी, संसद में बिल लाने की तैयारी

SHIELD Bill 2025: बच्चों को इंटरनेट और सोशल मीडिया के नुकसान से बचाने के लिए बीजेपी सांसद बैजयंत ‘जय’ पांडा ने SHIELD Bill 2025 तैयार किया है। इसका पूरा नाम ‘सेफगार्डिंग हेल्दी इंटरनेट एनवायरनमेंट्स फॉर लिटिल डिजिटल-नेटिव्स’ है। यह एक प्राइवेट मेंबर बिल है, जिसमें बच्चों के सोशल मीडिया अकाउंट, ऑनलाइन गेमिंग, डेटा प्राइवेसी और पर्सनलाइज्ड विज्ञापनों को लेकर सख्त नियमों का प्रस्ताव है। हालांकि, शुक्रवार को संसद में हंगामे और कार्यवाही स्थगित होने के कारण बिल औपचारिक रूप से पेश नहीं हो सका।

प्रस्ताव के मुताबिक 18 साल से कम उम्र के लोगों को नाबालिग माना जाएगा। 13 साल से कम उम्र के बच्चे माता-पिता या अभिभावक की वेरिफाइड सहमति के बिना सोशल मीडिया या ऑनलाइन गेमिंग अकाउंट नहीं बना सकेंगे।

बच्चों की ट्रैकिंग और प्रोफाइलिंग पर रोक

बच्चों के ऑनलाइन व्यवहार की ट्रैकिंग, प्रोफाइलिंग और उनके डेटा के आधार पर पर्सनलाइज्ड विज्ञापन दिखाने पर रोक का प्रस्ताव है। उनका डेटा जरूरत भर ही लिया जा सकेगा और अकाउंट निष्क्रिय होने के 90 दिन के भीतर मिटाना होगा। अभिभावक के अनुरोध पर इसे स्थायी रूप से हटाना होगा।

प्लेटफॉर्म्स को मजबूत एज वेरिफिकेशन सिस्टम और पैरेंटल डैशबोर्ड देना होगा। इससे माता-पिता गतिविधियां देख सकेंगे, प्राइवेसी सेटिंग बदल सकेंगे और स्क्रीन टाइम सीमित कर सकेंगे।

शिकायत पर 24 घंटे में कार्रवाई

प्लेटफॉर्म्स पर ‘Report Child Harm’ बटन जरूरी होगा। शिकायत पर 24 घंटे में जवाब और 48 घंटे में निपटारा करना होगा। सामान्य हानिकारक कंटेंट 36 घंटे और CSAM 24 घंटे में हटाना होगा। उल्लंघन पर 10 करोड़ तक जुर्माना और बार-बार उल्लंघन पर IT Act की धारा 69A के तहत अस्थायी ब्लॉकिंग का प्रस्ताव है।

पांडा का दूसरा प्रस्तावित बिल AI डीपफेक पर है। इसमें बिना सहमति आवाज, चेहरा या शरीर की फर्जी AI सामग्री बनाने-फैलाने पर रोक, 24 घंटे में टेकडाउन और अश्लील सामग्री के लिए 12 घंटे की समयसीमा का प्रस्ताव है। अपराध पर 3 साल तक जेल और ₹10 लाख तक जुर्माने का प्रावधान रखा गया है।

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