UP BJP की 712 सदस्यीय कार्यसमिति घोषित, PM मोदी समेत बड़े नेता बने विशेष आमंत्रित सदस्य
UP BJP State Working Committee 2027: उत्तर प्रदेश में 2027 के विधानसभा चुनाव से पहले भारतीय जनता पार्टी (BJP) ने संगठन को मजबूत करने की दिशा में बड़ा कदम उठाया है। पार्टी ने 712 सदस्यों वाली प्रदेश कार्यसमिति की घोषणा की है। इसमें प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह, मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ और दोनों उपमुख्यमंत्रियों समेत कई वरिष्ठ नेताओं को जगह दी गई है। अब 30 और 31 अक्टूबर को लखनऊ में होने वाली कार्यसमिति की बैठक में चुनावी तैयारियों पर चर्चा होगी।
548 कार्यसमिति सदस्य, 30 स्थायी और 134 विशेष आमंत्रित
प्रदेश अध्यक्ष पंकज चौधरी की ओर से जारी सूची में कुल 712 सदस्य शामिल हैं। इनमें 548 प्रदेश कार्यसमिति सदस्य, 30 स्थायी आमंत्रित सदस्य और 134 विशेष आमंत्रित सदस्य बनाए गए हैं।
स्थायी आमंत्रित सदस्यों में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह, मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ और उपमुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्य व ब्रजेश पाठक शामिल हैं। केंद्रीय मंत्रियों, पूर्व केंद्रीय मंत्रियों और पार्टी के वरिष्ठ पदाधिकारियों को भी जगह दी गई है।
क्षेत्रीय और जिला स्तर के नेताओं को शामिल कर कार्यसमिति का विस्तार किया गया है। इसे चुनाव से पहले संगठन के अलग-अलग स्तरों के नेताओं को एक मंच पर लाने की कवायद के तौर पर देखा जा रहा है।
अमित शाह की मौजूदगी में मिशन-2027 पर मंथन
30 अक्टूबर को प्रस्तावित बैठक में केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह, मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ, प्रदेश अध्यक्ष पंकज चौधरी और संगठन महामंत्री धर्मपाल सिंह समेत वरिष्ठ नेताओं के शामिल होने की संभावना है। इससे पहले 29 अक्टूबर को प्रदेश पदाधिकारियों की बैठक भी रखी गई है।
UP BJP State Working Committee की बैठक में बूथ स्तर पर संगठन की सक्रियता, कार्यकर्ताओं की भूमिका, क्षेत्रवार राजनीतिक चुनौतियों और सरकार की योजनाओं को जनता तक पहुंचाने जैसे मुद्दों पर चर्चा हो सकती है। हालांकि, विस्तृत आधिकारिक एजेंडा अभी सामने नहीं आया है।
PDA की चुनौती और सामाजिक समीकरणों पर नजर
2024 के लोकसभा चुनाव में उत्तर प्रदेश में बीजेपी की सीटें घटने के बाद पार्टी के सामने संगठन को और सक्रिय करने की चुनौती है। 2027 के विधानसभा चुनाव में समाजवादी पार्टी के PDA फॉर्मूले का मुकाबला करने के लिए पिछड़े वर्गों, दलितों, युवाओं और महिलाओं के बीच पहुंच बढ़ाना भी रणनीति का हिस्सा हो सकता है।
सहयोगी दलों के साथ तालमेल, स्थानीय नेताओं के बीच समन्वय और कार्यकर्ताओं की नाराजगी जैसे मुद्दे भी अहम रहेंगे। अब सबकी नजर 30 और 31 अक्टूबर की बैठक पर है, जहां से बीजेपी की चुनावी तैयारियों की दिशा के संकेत मिल सकते हैं।
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