बिजली निजीकरण और छंटनी के खिलाफ हल्ला बोल, सुभाष लांबा बोले- गरीबों पर बढ़ेगा बोझ
Lucknow News: उत्तर प्रदेश बिजली एम्पलाइज यूनियन का राज्य सम्मेलन लखनऊ के उदयगंज स्थित जय हिंद चबूतरा में संपन्न हुआ। सम्मेलन का उद्घाटन इलेक्ट्रिसिटी एम्पलाइज फेडरेशन ऑफ इंडिया (ईईएफआई) के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष सुभाष लांबा ने किया। इस दौरान बिजली क्षेत्र के निजीकरण और संविदा कर्मचारियों की छंटनी समेत कई मुद्दों पर चर्चा हुई।

बिजली निजीकरण को लेकर केंद्र पर निशाना
सुभाष लांबा ने कहा कि आजादी के बाद बिजली को सार्वजनिक आवश्यक सेवा बनाया गया और बिजली आपूर्ति अधिनियम के तहत राज्यों में बिजली बोर्ड गठित किए गए। इनका उद्देश्य आम लोगों तक बिजली पहुंचाने के साथ कृषि और उद्योग का विकास करना था। उन्होंने कहा कि बिजली बोर्डों की सब्सिडी वाली आपूर्ति से किसानों को फायदा मिला और हरित क्रांति को बढ़ावा मिला।
उन्होंने कहा कि 1980 के दशक में जनरेशन और 1990 में डिस्ट्रीब्यूशन में निजी क्षेत्र को प्रवेश मिला। 2003 में बिजली एक्ट के जरिए राज्य बिजली बोर्डों का विघटन कर निगमीकरण किया गया। उनके मुताबिक 2003 में बोर्डों का घाटा 26 हजार करोड़ रुपये था, जो अब बढ़कर 7 लाख करोड़ रुपये हो गया है।
लांबा ने बिजली अमेंडमेंट बिल, पैरलल लाइसेंस, स्मार्ट मीटरिंग और एग्री डिस्कॉम को निजीकरण के पैकेज का हिस्सा बताते हुए विरोध की बात कही। उन्होंने कहा कि सब्सिडी और क्रॉस सब्सिडी खत्म होने से गरीब और किसानों के लिए बिजली महंगी हो सकती है।
25 हजार संविदाकर्मियों की छंटनी का मुद्दा
उन्होंने यूपी में 25 हजार से ज्यादा ठेका-संविदा कर्मचारियों की छंटनी की आलोचना की और सभी को दोबारा ड्यूटी पर लेने की मांग की। सम्मेलन में नई 55 सदस्यीय राज्य समिति चुनी गई। सुरेंद्र सिंह अध्यक्ष, विशंभर सिंह महामंत्री और शिव शंकर कोषाध्यक्ष चुने गए। सम्मेलन का समापन सीटू महासचिव पीएन राय ने किया।
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