मरहूमा अज़ीज़ जहाँ की पांचवीं बरसी पर समाजसेवा करने वाली महिलाओं को अम्मा मरियम अवॉर्ड से किया गया सम्मानित

Lucknow News: ऑल इंडिया जमीयतुल कुरैश के ज़िलाध्यक्ष शहज़ाद कुरैशी के कार्यालय में मरहूमा अज़ीज़ जहाँ की पांचवीं बरसी के अवसर पर एक गरिमामयी कार्यक्रम का आयोजन किया गया। इसमें विभिन्न सामाजिक, शैक्षिक और साहित्यिक हस्तियों ने भाग लिया। कार्यक्रम की अध्यक्षता शाहीन असलम ने की, जबकि संचालन की ज़िम्मेदारी हाफ़िज़ अमीर अहमद ने बखूबी निभाई।

कार्यक्रम की शुरुआत क़ारी शम्सुज़्ज़ुहा नदवी द्वारा पवित्र क़ुरआन की तिलावत से हुई, जिससे पूरा वातावरण आध्यात्मिक भावनाओं से भर गया। इस अवसर पर मरहूमा अज़ीज़ जहाँ की सामाजिक सेवाओं, इंसानियत और महिलाओं के कल्याण के लिए किए गए कार्यों को श्रद्धांजलि अर्पित की गई। वक्ताओं ने कहा कि मरहूमा अज़ीज़ जहाँ ने हमेशा समाज के कमजोर और ज़रूरतमंद वर्गों की मदद को अपनी ज़िंदगी का मकसद बनाया और उनकी सेवाओं को हमेशा याद रखा जाएगा।

कार्यक्रम में राष्ट्रीय सामाजिक कार्यकर्ता संगठन के संयोजक मोहम्मद आफ़ाक़ की ओर से समाजसेवा करने वाली प्रमुख महिलाओं- सादिया काज़िम, डॉ. तस्नीम फ़ातिमा, शगुफ़्ता अंजुम, जहाँआरा, रिज़वाना सिद्दीकी, शाहीन इस्लाम, शहनशाह अंसारी, नेहा परवीन, रूबीना अयाज़ और शाहाना सुल्ताना को शहज़ाद कुरैशी के हाथों “अम्मा मरियम अवॉर्ड” से सम्मानित किया गया। सम्मान प्राप्त करने वाली महिलाओं ने कहा कि इस प्रकार का सम्मान समाजसेवा के जज़्बे को और अधिक मज़बूत करता है।

अपने संबोधन में मोहम्मद आफ़ाक़ ने कहा कि उन्होंने वर्ष 1990 से समाजसेवा का सफ़र शुरू किया था, जिसमें अनेक लोगों ने उनका मार्गदर्शन और हौसला बढ़ाया। उन्होंने कहा कि आज यदि उनके साथ इतने लोग जुड़े हैं तो यह जनता के प्रेम और विश्वास का परिणाम है। उन्होंने कहा कि समाजसेवा किसी एक व्यक्ति का कार्य नहीं बल्कि पूरे समाज की साझा ज़िम्मेदारी है।

मोहम्मद आफ़ाक़ ने अपने विचार व्यक्त करते हुए मशहूर शेर पढ़ा- “मैं अकेला ही चला था जानिब-ए-मंज़िल मगर,लोग आते गए और कारवां बनता गया।”

कार्यक्रम को संबोधित करते हुए शहज़ाद कुरैशी ने कहा कि समाज में महिलाओं की भूमिका अत्यंत महत्वपूर्ण है और सामाजिक क्षेत्र में कार्य करने वाली महिलाओं का सम्मान समय की आवश्यकता है। उन्होंने कहा कि मरहूमा अज़ीज़ जहाँ की याद में आयोजित यह कार्यक्रम नई पीढ़ी को मानव सेवा का संदेश देता है।

इस अवसर पर बड़ी संख्या में सामाजिक कार्यकर्ताओं, गणमान्य नागरिकों, महिलाओं और युवाओं ने भाग लिया। उपस्थित लोगों ने मरहूमा अज़ीज़ जहाँ की मग़फ़िरत के लिए दुआ की और उनकी सेवाओं को श्रद्धांजलि अर्पित की।

अंत में मोहम्मद आफ़ाक़ ने सभी अतिथियों, सामाजिक कार्यकर्ताओं और कार्यक्रम में शामिल लोगों का धन्यवाद करते हुए कहा कि भविष्य में भी इसी प्रकार के सामाजिक और जनकल्याणकारी कार्यक्रम आयोजित किए जाते रहेंगे।

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