2 मिनट में 11 वार्निंग, तीनों हाइड्रोलिक सिस्टम फेल, एयर इंडिया टर्बुलेंस मामले में बड़ा खुलासा
Air India Flight Turbulence: थाईलैंड के फुकेत से नई दिल्ली आ रही एयर इंडिया की फ्लाइट AI2379 में 4 अगस्त को हुए भीषण टर्बुलेंस मामले में अब विमान की पोस्ट-फ्लाइट मेंटेनेंस रिपोर्ट से अहम जानकारी सामने आई है। रिपोर्ट के मुताबिक, संकट के दौरान महज 2 से 3 मिनट के भीतर विमान को 11 आपातकालीन चेतावनी सिग्नल मिले थे। इस घटना में 17 लोग घायल हुए थे।
एयरबस A320 में उस समय 137 यात्री और चालक दल के 8 सदस्य समेत कुल 145 लोग सवार थे। उड़ान के दौरान विमान अचानक करीब 300 फीट नीचे आ गया। विमान बाद में सुरक्षित दिल्ली पहुंच गया। घटना की जांच फिलहाल जारी है।
एक के बाद एक आने लगीं सिस्टम फेलियर की चेतावनियां
रिपोर्ट के अनुसार, सबसे पहले विमान के ग्रीन हाइड्रोलिक सिस्टम में लो प्रेशर की चेतावनी आई। इसके बाद ब्लू और येलो हाइड्रोलिक सिस्टम से जुड़े अलर्ट भी सामने आने लगे। यानी कुछ ही समय में विमान के तीनों हाइड्रोलिक सिस्टम से संबंधित गड़बड़ियां रिकॉर्ड हुईं।
इसके बाद ऑटोपायलट डिस्कनेक्ट हुआ और फ्लाइट कंट्रोल से जुड़ी समस्या की चेतावनी आई। हाइड्रोलिक सिस्टम से जुड़े तीन और अलर्ट मिले, जिनमें हाइड्रोलिक फ्लूइड और ईंधन के बेहद कम स्तर का संकेत था।
इसी दौरान इमरजेंसी एग्जिट डोर से जुड़ा अलर्ट भी आया, जो केबिन प्रेसराइजेशन से संबंधित समस्या की ओर इशारा कर रहा था। विमान के ग्रीन, ब्लू और येलो हाइड्रोलिक सर्किट उड़ान नियंत्रण के लिए महत्वपूर्ण हैं, इसलिए इतने कम समय में इनके संबंध में अलर्ट मिलना जांच का अहम हिस्सा बन गया है।
टर्बुलेंस में 17 लोग हुए थे घायल
Air India Flight Turbulence: अचानक विमान के नीचे आने से यात्रियों और क्रू को झटका लगा। शुरुआती रिपोर्टों के मुताबिक 13 यात्रियों और 4 क्रू सदस्यों समेत 17 लोग घायल हुए थे। विमान सुरक्षित दिल्ली में उतरा और घायलों को मेडिकल सहायता उपलब्ध कराई गई।
घटना के दौरान पायलट और को-पायलट की भूमिका को लेकर भी जांच हो रही है। पायलट ने बताया था कि वह कुछ समय के लिए ‘कंट्रोल्ड रेस्ट’ पर था और उस दौरान विमान का नियंत्रण फर्स्ट ऑफिसर के पास था। हालांकि, जांच एजेंसियां तकनीकी, ऑपरेशनल और मानवीय पहलुओं को अलग-अलग देख रही हैं।
विमान के हाइड्रोलिक सिस्टम, ऑटोपायलट और फ्लाइट कंट्रोल से जुड़े अलर्ट की जांच इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि अभी किसी एक कारण को हादसे की वजह नहीं माना गया है।

