लखनऊ नगर निगम में अफसरशाही हावी या प्रोटोकॉल की अनदेखी? मेयर ने नगर आयुक्त से मांगा जवाब

Sandesh Wahak Digital Desk: लखनऊ नगर निगम के भीतर एक बार फिर अफसरशाही और जनप्रतिनिधित्व के बीच टकराव देखने को मिला। नगर निगम के एक औपचारिक कार्यक्रम में मेयर सुषमा खर्कवाल को आमंत्रित नहीं किया गया, जिससे वे बेहद नाराज़ हो गईं।

बिना बुलावे कार्यक्रम स्थल पर पहुंचीं मेयर

हजरतगंज स्थित नगर निगम मुख्यालय में मृतक आश्रितों को नियुक्ति पत्र देने और सेवानिवृत्त कर्मचारियों को सम्मानित करने का कार्यक्रम आयोजित किया गया था। आश्चर्यजनक रूप से नगर प्रमुख को इस कार्यक्रम की जानकारी तक नहीं दी गई। मौखिक सूचना मिलने पर मेयर स्वयं कार्यक्रम स्थल पहुंचीं, लेकिन वहां नगर आयुक्त गौरव कुमार और अपर नगर आयुक्त नम्रता सिंह मौजूद नहीं थे।

मौके पर ही नाराजगी जाहिर करते हुए मेयर ने नगर आयुक्त को पत्र लिखकर औपचारिक जवाब मांगा और 5 अगस्त तक स्पष्टीकरण देने का अल्टीमेटम दिया। उन्होंने स्पष्ट चेतावनी दी कि अगर जवाब संतोषजनक नहीं हुआ तो यह मामला शासन स्तर तक उठाया जाएगा। मेयर ने यहां तक कहा कि, “अधिकारियों को प्रोटोकॉल सीखने की जरूरत है या शासन से इसका प्रशिक्षण लेना चाहिए।”

अधिकारियों की सफाई

अपर नगर आयुक्त नम्रता सिंह ने फोन पर बताया कि वे प्रमुख सचिव, नगर विकास की वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग में व्यस्त थीं, इसलिए कार्यक्रम में देरी से पहुंचीं। हालांकि, इससे मेयर का गुस्सा शांत नहीं हुआ।

मेयर का आरोप

अपने पत्र में मेयर ने लिखा, “30-35 साल तक सेवा देने वालों की विदाई में माला पहनाकर ढोल-नगाड़े से स्वागत हुआ, लेकिन मुझे इसकी सूचना तक नहीं दी गई। यह बेहद दुर्भाग्यपूर्ण है, इसलिए मैं दिल्ली से तुरंत लखनऊ लौट आई।”

आपको बता दें कि इस कार्यक्रम में आठ मृतक आश्रितों मयंक दीक्षित, सागर राठौर, दीपक कुमार, आनंद कुमार, मनीष कुमार, सुमन, ब्रिजेंद्र कुमार रावत और अजय कुमार यादव को सफाई कर्मी पद पर नियुक्ति पत्र दिए गए।

 

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