लखनऊ में करोड़ों के कोडीन सिरप रैकेट का पर्दाफाश, दो दवा कंपनियां NDPS एक्ट में फंसीं
Sandesh Wahak Digital Desk: राजधानी लखनऊ के ट्रांसपोर्ट नगर से चल रहे कोडीन युक्त कफ सिरप के अवैध कारोबार का खाद्य सुरक्षा एवं औषधि प्रशासन (FSDA) उत्तर प्रदेश की टीम ने बड़ा पर्दाफाश किया है। छापेमारी और जांच के बाद दो दवा कंपनियों आर्पिक फार्मास्युटिकल्स प्रा. लि. और इधिका लाइफसाइंसेज प्राइवेट लिमिटेड को नशे की दवाओं की अवैध सप्लाई चेन में सीधे तौर पर शामिल पाया गया है।
विभाग ने दोनों कंपनियों के संचालकों के खिलाफ नारकोटिक ड्रग्स एंड साइकोट्रॉपिक सब्सटेंसेस एक्ट (NDPS) और भारतीय न्याय संहिता (BNS) की गंभीर धाराओं में मुकदमा दर्ज कराया है।
सिस्टर कंसर्न का सुनियोजित नेटवर्क
FSDA की जांच में यह चौंकाने वाला खुलासा हुआ कि दोनों फार्मा कंपनियां एक ही परिवार के स्वामित्व में हैं और सिस्टर कंसर्न के रूप में काम कर रही थीं। उन्होंने फेनसीपिक-टीपी जैसे कोडीनयुक्त सिरप का बड़े पैमाने पर अवैध वितरण किया।
जांच में सामने आया कि आर्पिक फार्मास्युटिकल्स अपने पूरे स्टॉक की आपूर्ति इधिका लाइफसाइंसेज को करती थी। इधिका लाइफसाइंसेज आगे फर्जी बिलिंग के ज़रिए दवाओं को नशे के रूप में बेचती थी। विभाग ने इसे सुनियोजित नेटवर्क करार दिया है, जिसका उद्देश्य अधिक मुनाफा कमाने के लिए प्रतिबंधित औषधियों को अवैध रूप से बाज़ार में उतारना था।
निरस्त लाइसेंस और कूटरचित बिलिंग
अवैध धंधे को छिपाने के लिए कंपनियों ने फर्जीवाड़ा किया। जांच में कई ऐसे प्रमाण मिले जो कंपनियों की साजिश को उजागर करते हैं।
लखीमपुर खीरी की न्यू रॉयल मेडिकल स्टोर, जिसका लाइसेंस वर्ष 2023 में निरस्त हो चुका था, उसके नाम पर 10 अक्टूबर 2025 तक फेनसीपिक-टी की सप्लाई दिखाई गई। कौशांबी जिले की विकास मेडिसिन नामक मेडिकल स्टोर जो वर्ष 2022 से बंद है, उसे 2024 तक अवैध बिलिंग में उपयोग किया गया। उन्नाव की अजय मेडिकल स्टोर और प्रतापगढ़ की यूनिवर्सल मेडिकल ने स्पष्ट किया कि उन्होंने कभी इन दवाओं की खरीद नहीं की। इन सभी प्रमाणों से यह स्पष्ट हुआ कि कंपनियों ने कूटरचित बिलिंग के ज़रिए कोडीन सिरप की डिलीवरी अन्य राज्यों में की, जिसे बाद में नशे के रूप में बेचा गया।
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