‘गन्ना उत्पादन में गिरावट से बढ़ी किसानों की तंगी’, किसान नेता ने सरकार की नीति पर उठाए सवाल
पडरौना (कुशीनगर)। भारतीय किसान संघर्ष समिति के अध्यक्ष और वरिष्ठ किसान नेता मो. अशरफ आलम खां ने सरकार की नीतियों को गन्ना किसानों की बदहाली के लिए जिम्मेदार ठहराया है। बोदरवार के समीप असना गांव में आयोजित किसान गोष्ठी में उन्होंने कहा कि सरकार की गन्ना के प्रति “उपेक्षात्मक नीति” के कारण न केवल गन्ने का रकबा (क्षेत्रफल) कम हुआ है, बल्कि उत्पादन भी आश्चर्यजनक ढंग से घट गया है। इसका सीधा नतीजा किसानों की आय में निरंतर कमी है, जिससे वे तंगहाली में जीवन जीने को विवश हैं।
बंद चीनी मिलों को चलाने की मांग
मो. अशरफ आलम खां ने पूर्वांचल के किसानों की उपेक्षा पर गहरी चिंता व्यक्त की। उन्होंने कहा कि पूर्वांचल में कई चीनी मिलों की बंदी और बंद पड़ी मिलों को दोबारा न चलाए जाने से किसानों की उपेक्षा स्पष्ट है। उन्होंने सरकार से किसान हित में उदारात्मक रवैया अपनाने और बंद पड़ी चीनी मिलों, जैसे पडरौना, कठकुईयां, सरदार नगर, गौरी बाजार, और वाल्टरगंज को पुनः चलवाने की पहल करने की मांग की। उन्होंने इन बंद मिलों पर किसानों के बकाया गन्ना मूल्य के भुगतान के प्रति भी सरकार को संवेदनशील होने की अपील की।
पश्चिमी यूपी की तर्ज पर खेती की सलाह
किसान नेता ने तुलना करते हुए बताया कि पश्चिमी उत्तर प्रदेश में गन्ने की बेहतर उपज के कारण वहाँ के किसानों की आर्थिक स्थिति पूर्वांचल के मुकाबले अच्छी है। उन्होंने पूर्वांचल के किसानों से आग्रह किया कि वे पश्चिमी यूपी की तर्ज पर गन्ने की उपज बढ़ाएं। वैज्ञानिक विधि से खेती करके ही किसान अपनी आर्थिक बदहाली को दूर कर सकते हैं। उन्होंने किसानों को मिट्टी का परीक्षण करवाकर गन्ने का रकबा बढ़ाने और आर्थिक उन्नति के प्रति जागरूक होने की सलाह दी।
क्षमता बढ़ी, पेराई दिवस घटे
खां ने बताया कि मुण्डेरवा सहित कई निजी चीनी मिलों ने अपनी पेराई क्षमता में बढ़ोतरी की है, लेकिन गन्ना उत्पादन कम होने के कारण पेराई दिवसों में काफी कमी आई है। उन्होंने रामकोला, ढ़ाढ़ा, प्रतापपुर, गड़ौरा, सिसवा बाजार, खड्डा आदि मिलों की पेराई क्षमता में सुधार की सराहना की, लेकिन उत्पादन कम होने पर चिंता जताई। संघर्ष समिति के उपाध्यक्ष देव उपाध्याय ने भी गन्ना उपज बढ़ाने, किसानों के हित में ठोस निर्णय लेने और बकाया मूल्य भुगतान पर जोर दिया।
रिपोर्ट: राघवेंद्र मल्ल
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