Varanasi News: देश के पहले हाइड्रोजन-चालित जलयान को मिली हरी झंडी
Varanasi News: उत्तर प्रदेश के वाराणसी में आज भारत के हरित परिवहन के लिए एक ऐतिहासिक दिन रहा। केंद्रीय पत्तन, पोत परिवहन और जलमार्ग मंत्री सर्बानंद सोनोवाल ने नमो घाट पर देश के पहले हाइड्रोजन चालित जलयान को हरी झंडी दिखाकर रवाना किया।
केंद्रीय मंत्री ने इस अवसर पर आयोजित समारोह में कहा कि वाराणसी से शुरू होने वाला यह हाइड्रोजन क्रूज़ न केवल भारत की तकनीकी प्रगति और दक्षता का प्रतीक है, बल्कि यह स्वदेशीकरण की दिशा में एक बड़ी सफलता है।
सर्बानंद सोनोवाल ने कहा कि यह जलयान हरित परिवहन के अगले युग को परिभाषित करेगा और जल आधारित संचार को मजबूत करेगा। उन्होंने जोर देकर कहा कि हाइड्रोजन से चलने वाला यह क्रूज गैसों का उत्सर्जन कम करेगा और पर्यावरण संरक्षण की दिशा में एक मील का पत्थर साबित होगा।
उन्होंने देश के जलमार्गों के विस्तार की जानकारी देते हुए बताया, पहले भारत में केवल पाँच नेशनल वाटरवेज थे, जो अब बढ़कर 111 हो गए हैं। वर्तमान में, 32 जलमार्गों पर कार्गो और यात्री जहाजों का संचालन हो रहा है, जबकि 13 नेशनल वाटरवेज पर क्रूज चल रहे हैं। यह हाइड्रोजन जलयान पूरी तरह से भारत में निर्मित है, हालाँकि इसमें ब्रिटिश टेक्नोलॉजी का उपयोग किया गया है।

निर्माण स्थल: केरल के कोच्चि शिपयार्ड में इसका निर्माण 10 करोड़ रुपये की लागत से हुआ है।
क्षमता: यह 50 सीटर क्षमता का स्वदेशी क्रूज है।
तकनीक: इसमें चार हाइड्रोजन सिलेंडर लगे हैं, और यह एक बार चार्ज होने पर आठ घंटे तक चल सकता है। बैकअप के लिए इसे इलेक्ट्रिक (बैटरी) से भी संचालित किया जा सकता है।
संचालन: 28 मीटर लंबे और 5.8 मीटर चौड़े इस क्रूज पर 10 क्रू मेम्बर तैनात होंगे, और यह गंगा में 20 से 25 किलोमीटर प्रति घंटे की गति से संचालित होगा।
ईंधन स्टेशन: जलयान में ईंधन भरने के लिए राल्हूपुर (रामनगर) स्थित मल्टी मॉडल टर्मिनल पर हाइड्रोजन फ्यूल स्टेशन भी बनाया गया है।
इस दौरान परिवहन राज्यमंत्री दयाशंकर सिंह, आयुष राज्यमंत्री डॉ. दयाशंकर मिश्र ‘दयालु’ सहित कई वरिष्ठ अधिकारियों और जन प्रतिनिधियों ने कार्यक्रम को संबोधित किया।

