SIR नहीं, यह वोट काटने की साजिश और BLO पर जानलेवा दबाव है: आराधना मिश्रा ‘मोना’

Sandesh Wahak Digital Desk: उत्तर प्रदेश कांग्रेस विधानमंडल दल की नेता आराधना मिश्रा ‘मोना’ ने मंगलवार को विधानसभा स्थित कांग्रेस कार्यालय में प्रेस वार्ता कर योगी सरकार और निर्वाचन आयोग को आड़े हाथों लिया। उन्होंने आरोप लगाया कि बिना तैयारी और प्रशिक्षण के आनन-फानन में कराई जा रही विशेष संक्षिप्त पुनरीक्षण (SIR) प्रक्रिया के कारण प्रदेश में दर्जनों बी.एल.ओ. (BLO) अपनी जान गंवा चुके हैं।

BLO की मौतों पर सरकार को घेरा

आराधना मिश्रा ने कहा कि सरकार की अदूरदर्शिता और अमानवीय कार्ययोजना के कारण कर्मचारी अत्यधिक मानसिक दबाव में हैं। उन्होंने मृतक कर्मचारियों के नाम गिनाते हुए सरकार से जवाब मांगा।

बिजनौर में शोभा रानी, देवरिया में लेखपाल आशीष व रंजू दुबे, फतेहपुर में सुधीर कुरील (27 वर्ष), गोंडा में विपिन यादव, बरेली में प्रवक्ता अजय अग्रवाल और लखनऊ में विजय कुमार वर्मा की मौत ड्यूटी के दौरान हुई। बुलंदशहर में शिक्षिका रजनी ने व्हाट्सएप संदेश लिखकर आत्महत्या कर ली, जबकि मेरठ में एक बी.एल.ओ. ने खुदकुशी की कोशिश की।

“शिक्षक पढ़ाएं या प्रशासनिक सिस्टम संभालें?”

आराधना मिश्रा ने सवाल उठाया कि स्कूलों से शिक्षकों को हटाकर SIR ड्यूटी में लगाने से बच्चों की पढ़ाई चौपट हो गई है। कांग्रेस नेता ने निर्वाचन प्रक्रिया पर गंभीर सवाल उठाते हुए कहा कि जीवित और पात्र मतदाताओं को, जो 2003 से सूची में हैं, जानबूझकर ‘कैटेगरी सी’ (संदेहात्मक) में डाला जा रहा है ताकि उनके वोट काटे जा सकें। गरीबों, मजदूरों और दिहाड़ी कामगारों के लिए फॉर्म भरने और लाइनों में लगने की प्रक्रिया इतनी कठिन बना दी गई है कि वे अपने लोकतांत्रिक अधिकार से वंचित हो रहे हैं। सरकार विपक्ष के सकारात्मक सुझावों को स्वीकार करने के बजाय उनकी नीयत पर सवाल उठाती है।

चौधरी चरण सिंह की जयंती पर नमन

पूर्व प्रधानमंत्री चौधरी चरण सिंह की जयंती पर उन्हें श्रद्धासुमन अर्पित करते हुए आराधना मिश्रा ने सदन में उनके योगदान की चर्चा की। उन्होंने कहा कि चौधरी साहब आजीवन किसानों के हितों और जमींदारी उन्मूलन के लिए समर्पित रहे। उन्होंने कहा कि भाजपा को चौधरी साहब से ईमानदारी की सीख लेनी चाहिए। आज का किसान सबसे ज्यादा प्रताड़ित है, जबकि सरकार सिर्फ उद्योगपतियों के विकास में लगी है। उन्होंने याद दिलाया कि कांग्रेस की UPA सरकार ने किसानों का ₹72,000 करोड़ का कर्ज माफ किया और भूमि अधिग्रहण बिल जैसे क्रांतिकारी कदम उठाए।

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