कानपुर रजिस्ट्री विभाग में आयकर का ‘महा-सर्वे’, 5 घंटे में 1100 करोड़ की हेराफेरी उजागर

Sandesh Wahak Digital Desk: उत्तर प्रदेश के कानपुर में रजिस्ट्री विभाग (सब-रजिस्ट्रार कार्यालय) में आयकर विभाग (Income Tax) की छापेमारी से हड़कंप मच गया है। सिविल लाइंस स्थित जोन-2 कार्यालय में हुए इस सर्वे के दौरान महज 5 घंटे की जांच में 1100 करोड़ की वित्तीय अनियमितताएं सामने आई हैं। विभाग को अंदेशा है कि इस खेल के जरिए सरकार को करीब 300 करोड़ के टैक्स का चूना लगाया गया है।

जांच में खुला फर्जीवाड़े का खेल

आयकर निदेशक (आसूचना एवं आपराधिक अन्वेषण) के निर्देश पर सहायक निदेशक विमलेश राय की अगुवाई में हुई इस जांच में चौंकाने वाले तथ्य मिले हैं।

कई रजिस्ट्री दस्तावेजों में पैन (PAN) नंबर की जगह मनगढ़ंत नंबर दर्ज कर दिए गए। रिकॉर्ड में दर्ज मोबाइल नंबर भी फर्जी पाए गए ताकि संपत्तियों की सही ट्रैकिंग न हो सके। महंगी व्यावसायिक और रिहायशी संपत्तियों को ‘खेती की जमीन’ बताकर जबरन फॉर्म-60 का लाभ दिया गया। आयकर विभाग को शक है कि इस तरीके से बेनामी संपत्तियों की बड़ी खेप खरीदी-बेची गई है। रजिस्ट्री विभाग द्वारा आयकर विभाग को भेजा गया डाटा वास्तविक रिकॉर्ड से मेल नहीं खा रहा था।

5 दिन में दूसरा बड़ा प्रहार

कानपुर रजिस्ट्री विभाग में भ्रष्टाचार की जड़ें काफी गहरी नजर आ रही हैं।

जोन-1 का सर्वे: पिछले सप्ताह जोन-1 में हुई जांच में ₹2500 करोड़ की हेराफेरी पकड़ी गई थी।

जोन-2 का सर्वे: अब जोन-2 में ₹1100 करोड़ का फर्जीवाड़ा मिला है।

बड़ा अनुमान: आयकर सूत्रों का मानना है कि यदि पिछले कई वर्षों के रिकॉर्ड की बारीकी से जांच हो, तो यह घोटाला ₹50,000 करोड़ तक पहुंच सकता है।

आगे की कार्रवाई

आयकर विभाग की 6 सदस्यीय टीम ने वर्ष 2020 से 2025 तक के दस्तावेजों को खंगाला है। संबंधित अधिकारियों को 10 दिन के भीतर स्पष्टीकरण और गायब दस्तावेज प्रस्तुत करने का नोटिस दिया गया है। विभाग अब उन खरीदारों और बिचौलियों की सूची तैयार कर रहा है जिन्होंने फर्जी पैन नंबरों का सहारा लिया था।

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