राजधानी दिल्ली में सांस संबंधी बीमारियों से बढ़ रहा मौतों का आकड़ा

Sandesh Wahak Digital Desk: दिल्ली सरकार की तरफ से जारी आधिकारिक आंकड़ों ने राजधानी में स्वास्थ्य से जुड़ी एक गंभीर तस्वीर पेश की है। रिपोर्ट के मुताबिक दिल्ली में सांस से जुड़ी बीमारियों से होने वाली मौतों का आंकड़ा लगातार बढ़ता जा रहा है, जो आने वाले समय के लिए चिंता का विषय माना जा रहा है।

सांस संबंधी बीमारियों से बढ़ती मौतें

सरकारी आंकड़ों के अनुसार साल 2024 में दिल्ली में सांस संबंधी बीमारियों से 9,211 मौतें दर्ज की गईं, जबकि साल 2023 में यह आंकड़ा 8,801 था। यानी एक ही साल में इन बीमारियों से होने वाली मौतों में बढ़ोतरी दर्ज की गई है। आमतौर पर सांस से जुड़ी बीमारियों में अस्थमा, निमोनिया, फेफड़ों का कैंसर और तपेदिक शामिल हैं, जिनमें मरीजों को सांस लेने में गंभीर दिक्कतों का सामना करना पड़ता है। बढ़ते प्रदूषण और जीवनशैली से जुड़े कारणों को भी इसके पीछे एक अहम वजह माना जा रहा है।

दिल्ली में कुल मौतों की संख्या भी साल 2024 में बढ़कर 1,39,480 हो गई, जबकि साल 2023 में यह संख्या 1,32,391 थी। इनमें 85,391 पुरुष, 54,051 महिलाएं और 38 अन्य लिंग के लोग शामिल थे। कुल मौतों में से 90,883 मामलों को चिकित्सकीय रूप से प्रमाणित किया गया। बढ़ती मृत्यु संख्या यह संकेत देती है कि राजधानी की स्वास्थ्य व्यवस्था पर दबाव लगातार बढ़ रहा है।

शिशु मृत्यु दर में दिखा मामूली सुधार

हालांकि रिपोर्ट में एक सकारात्मक संकेत भी सामने आया है। दिल्ली में शिशु मृत्यु दर में मामूली सुधार दर्ज किया गया है। साल 2024 में प्रति 1000 जीवित जन्मों पर शिशु मृत्यु दर 22.4 रही, जबकि साल 2023 में यह 23.61 थी। शिशु मृत्यु दर एक वर्ष से कम उम्र के बच्चों की मृत्यु का माप मानी जाती है, और इसमें आई यह हल्की गिरावट स्वास्थ्य सेवाओं में कुछ सुधार की ओर इशारा करती है।

ताजा आंकड़ों के मुताबिक साल 2024 में मौत का सबसे बड़ा कारण दिल और रक्त संचार से जुड़ी बीमारियां रहीं। इस दौरान 21,262 लोगों की मौत इन बीमारियों के कारण हुई, जिनमें आर्टरी ब्लॉकेज, स्ट्रोक और हार्ट अटैक जैसे मामले शामिल हैं। साल 2023 में यह संख्या 15,714 थी, यानी एक साल में इसमें भी तेज बढ़ोतरी दर्ज की गई है।

जन्म दर घटी, मृत्यु दर बढ़ी

मृत्यु के दूसरे सबसे बड़े कारण के रूप में संक्रामक और परजीवी रोग सामने आए हैं। साल 2024 में इस श्रेणी में 16,060 मौतें दर्ज की गईं। ये बीमारियां आमतौर पर बैक्टीरिया, वायरस और फंगस के कारण फैलती हैं और कई बार दूषित भोजन और पानी के जरिए संक्रमण का खतरा बढ़ जाता है। हालांकि राहत की बात यह रही कि साल 2023 में दर्ज 20,781 मौतों की तुलना में इसमें कमी आई है।

दस्तावेजों के मुताबिक साल 2024 में दिल्ली में कुल 3,06,459 जीवित जन्म दर्ज किए गए, जो पिछले साल की तुलना में 8,628 कम थे। इसी अवधि में जन्म दर घटकर 14 रह गई, जबकि साल 2023 में यह 14.66 थी। वहीं मृत्यु दर में बढ़ोतरी दर्ज की गई है, जो 2023 में 6.16 थी और 2024 में बढ़कर 6.37 हो गई। जन्म और मृत्यु दर की गणना प्रति 1,000 लोगों पर की जाती है।

जनसंख्या वृद्धि और जन्म प्रमाण पत्र की स्थिति

आंकड़ों के अनुसार आने वाले 10 सालों में यानी साल 2036 तक दिल्ली की जनसंख्या बढ़कर करीब 2.65 करोड़ होने का अनुमान है। दस्तावेजों में यह भी बताया गया है कि राजधानी में पांच वर्ष से कम आयु के 99.1 प्रतिशत बच्चों के पास जन्म प्रमाण पत्र मौजूद हैं, जो प्रशासनिक रिकॉर्ड और पहचान व्यवस्था के लिहाज से एक महत्वपूर्ण उपलब्धि मानी जा रही है।

 

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