लखनऊ में कांग्रेस को बड़ा झटका, मेराजुद्दीन सिद्दीकी के नेतृत्व में 50 कार्यकर्ताओं ने दिया इस्तीफा

Sandesh Wahak Digital Desk: उत्तर प्रदेश कांग्रेस संगठन को लखनऊ में उस समय बड़ा राजनीतिक झटका लगा, जब मेराजुद्दीन सिद्दीकी के नेतृत्व में पार्टी से जुड़े 50 कार्यकर्ताओं और पदाधिकारियों ने एक साथ सामूहिक इस्तीफा दे दिया। सभी ने कांग्रेस पार्टी की प्राथमिक सदस्यता से त्यागपत्र देते हुए यह फैसला वरिष्ठ नेता नसीमुद्दीन सिद्दीकी के समर्थन में लेने की बात कही है।

ग्राम उजरियाव, गोमती नगर निवासी मेराजुद्दीन सिद्दीकी पुत्र स्वर्गीय हाजी मोइउद्दीन सिद्दीकी ने इस पूरे घटनाक्रम में प्रमुख भूमिका निभाई। मेराजुद्दीन सिद्दीकी ने कांग्रेस के राष्ट्रीय अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे और उत्तर प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष अजय राय को पत्र भेजकर 30 जनवरी 2026 को पार्टी से इस्तीफा देने की औपचारिक जानकारी दी। उन्होंने साफ तौर पर लिखा कि वह अपने सहयोगियों के साथ कांग्रेस पार्टी की सदस्यता से सामूहिक रूप से इस्तीफा दे रहे हैं।

इन लोगों ने दिया इस्तीफा

मेराजुद्दीन सिद्दीकी के साथ इस्तीफा देने वालों में लखनऊ के कई सक्रिय चेहरे शामिल हैं। इनमें प्रमुख रूप से अफसाना बानो, वकारुन निशा, शहाबुद्दीन, सुनील सिंह, अजीमुद्दीन सिद्दीकी, नसीम अहमद एडवोकेट, सादिया, अवधेश मिश्रा एडवोकेट, फिरोज अहमद, सतीश कुमार रस्तोगी, हम्माद शेख, आवेश अहमद, विशु सिंह, शारुख, हसीब खान, असलम, फ़राज़ अहमद, निसार फातिमा, रहीम खान, फहीमुद्दीन, मेहरुनिशा, रुबीना खातून, सर्वेश यादव, अम्मार अहमद, एबाद, फ़राज़ अहमद, अरशद खान, अशरफ खान, जीशान खान, समीर खान, जलील सिद्दीकी, जलील (महिला), बुशरा, विजय सिंह, अब्दुल रकीब शेख, शिब्ली अब्दुल शेख, आसिफ खान प्रधान, जमीरुद्दीन, रिज़वान अहमद, विनीत सिंह, इंजीनियर मोहम्मद अकरम, अजय सिंह, अबरार सिद्दीकी, लालू, कैसर उर्फ पुत्तू भाई, प्रमोद सिंह, मुबीन खान, गयाज सिद्दीकी, रामबीर और अज़रा सिद्दीकी शामिल हैं।

मेराजुद्दीन सिद्दीकी ने कहा कि यह निर्णय सामूहिक विचार-विमर्श के बाद लिया गया है और सभी कार्यकर्ता नसीमुद्दीन सिद्दीकी के समर्थन में एकजुट हैं। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि आने वाले समय में वे किस राजनीतिक दिशा में आगे बढ़ेंगे, इस पर जल्द ही सार्वजनिक रूप से निर्णय लिया जाएगा।

इस सामूहिक इस्तीफे को लखनऊ की राजनीति में कांग्रेस के लिए एक बड़े संगठनात्मक झटके के तौर पर देखा जा रहा है, खासकर ऐसे समय में जब पार्टी उत्तर प्रदेश में खुद को मजबूत करने की कोशिशों में जुटी हुई है।

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