सुरक्षा की चिंता या राजनीतिक टकराव? स्पीकर ने पीएम मोदी को सदन में आने से क्यों किया मना, जानिए मामला

Sandesh Wahak Digital Desk: लोकसभा स्पीकर ओम बिरला ने सदन की कार्यवाही के दौरान सांसदों के व्यवहार पर गहरी नाराजगी और चिंता व्यक्त की है। बुधवार को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को राष्ट्रपति के अभिभाषण पर जवाब देना था, लेकिन विपक्ष के भारी शोर-शराबे और हंगामे के कारण सदन की गरिमा तार-तार होती दिखी। स्पीकर ने खुलासा किया कि उस दिन स्थिति इतनी संवेदनशील थी कि प्रधानमंत्री के साथ कोई भी ‘अप्रत्याशित घटना’ घट सकती थी।

‘अध्यक्ष के दफ्तर तक पहुंचा हंगामा, यह काला धब्बा है’

ओम बिरला ने बेहद भावुक और सख्त लहजे में कहा कि लोकसभा के इतिहास में उन्होंने ऐसा आचरण पहले कभी नहीं देखा। उन्होंने बताया कि कुछ सांसदों ने न केवल सदन के अंदर हंगामा किया, बल्कि वे विरोध को अध्यक्ष (स्पीकर) के कार्यालय तक ले गए। उन्होंने इसे संसदीय व्यवस्था पर एक ‘काला धब्बा’ बताते हुए कहा कि राजनीतिक मतभेदों की एक मर्यादा होनी चाहिए।

PM को रोकने की बड़ी वजह

स्पीकर ने सदन में बताया कि उन्हें पुख्ता जानकारी मिली थी कि कुछ विपक्षी सदस्य प्रधानमंत्री के भाषण के दौरान उनके आसन (Seat) तक पहुँचने की कोशिश कर सकते हैं। उन्होंने कहा मैंने खुद सदन में ऐसे दृश्य देखे जिससे स्थिति गंभीर लग रही थी। अगर प्रधानमंत्री के करीब कोई पहुंचता, तो यह लोकतंत्र के लिए बहुत दुर्भाग्यपूर्ण होता। इसी आशंका के चलते मैंने खुद प्रधानमंत्री से अनुरोध किया कि वे उस माहौल में सदन के भीतर न आएं। स्पीकर ने आभार जताते हुए कहा कि सदन के नेता होने के बावजूद पीएम मोदी ने उनके आग्रह का मान रखा और एक बड़े विवाद को टालने में सहयोग किया।

2004 के बाद पहली बार: बिना PM के भाषण के पारित हुआ प्रस्ताव

बजट सत्र के चौथे दिन भी टकराव कम नहीं हुआ। भारी शोर-शराबे के बीच राष्ट्रपति के अभिभाषण पर ‘धन्यवाद प्रस्ताव’ को बिना प्रधानमंत्री के भाषण के ही ध्वनिमत से पारित कर दिया गया। साल 2004 के बाद यह पहला मौका है जब देश के प्रधानमंत्री सदन में मौजूद तो थे, लेकिन विपक्ष के व्यवधान के कारण उनका संबोधन नहीं हो सका और प्रस्ताव पास करना पड़ा।

स्पीकर ने सभी दलों से अपील की है कि वे सदन की मर्यादा बनाए रखें, क्योंकि संसद केवल चर्चा की जगह नहीं, बल्कि देश के लोकतंत्र का मंदिर है।

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