घूसखोर पंडत पर सुप्रीम कोर्ट ने निर्माताओं को लगाई फटकार, बोले- समाज की दरारों को और न बढ़ाएं

Sandesh Wahak Digital Desk: नीरज पांडे की आगामी फिल्म ‘घूसखोर पंडत’ को लेकर सुप्रीम कोर्ट ने कड़ा रुख अपनाया है। फिल्म के टाइटल को अपमानजनक और सामाजिक सौहार्द के लिए खतरा बताते हुए अदालत ने केंद्र सरकार, सेंसर बोर्ड (CBFC) और फिल्म निर्माताओं को नोटिस जारी किया है। जस्टिस बीवी नागरत्ना की पीठ ने स्पष्ट कर दिया कि रचनात्मकता के नाम पर किसी वर्ग विशेष को बदनाम करना बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।

सुनवाई के दौरान अदालत ने अभिव्यक्ति की आजादी और सामाजिक जिम्मेदारी के बीच की रेखा को रेखांकित किया। कोर्ट ने कहा, अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता का मतलब यह नहीं है कि आप समाज के किसी हिस्से को बदनाम करें। ऐसे शीर्षक देश में अनावश्यक तनाव और अशांति पैदा कर सकते हैं। हमारे संविधान निर्माताओं ने भाईचारे पर जोर दिया था। भारत जैसे विविधतापूर्ण देश में समुदायों के बीच संतुलन बनाए रखना सबकी जिम्मेदारी है। जब समाज पहले से ही कई संवेदनशील मुद्दों से जूझ रहा हो, तो हम हाथ पर हाथ धरे नहीं बैठ सकते।

निर्माता ने मानी गलती, नाम बदलने को तैयार

बढ़ते विवाद और कोर्ट के कड़े तेवर देख फिल्म निर्माता की ओर से बचाव में कहा गया कि फिल्म का विवादित ट्रेलर सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स से हटा लिया गया है। फिल्म का नाम बदलने की प्रक्रिया शुरू कर दी गई है।

इस पर सुप्रीम कोर्ट ने आदेश दिया कि निर्माता एक लिखित हलफनामा दाखिल करें। इसमें उन्हें साफ तौर पर बताना होगा कि फिल्म का नया नाम क्या होगा और यह भी सुनिश्चित करना होगा कि फिल्म के कंटेंट में किसी समुदाय के खिलाफ कुछ भी आपत्तिजनक नहीं है।

फिल्म के खिलाफ कोर्ट पहुंचे याचिकाकर्ताओं का कहना है कि टाइटल ‘घूसखोर पंडत’ सीधे तौर पर एक विशेष समुदाय को निशाना बनाता है और उन्हें नकारात्मक रोशनी में पेश करता है। याचिका में मांग की गई है कि इस तरह के कंटेंट की ऑनलाइन स्ट्रीमिंग पर तब तक रोक लगाई जाए जब तक कि इसमें सुधार न हो जाए। मामले की अगली सुनवाई 19 फरवरी को होगी।

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