Tariq Rehman की संभावित ताजपोशी से भारत-बांग्लादेश रिश्तों में बदलाव के संकेत

Sandesh Wahak Digital Desk: बांग्लादेश के चुनाव में बीएनपी की बड़ी जीत के बाद तारिक रहमान (Tariq Rehman) के प्रधानमंत्री बनने का रास्ता साफ होता नजर आ रहा है। चुनाव नतीजों के बाद उनकी नीतियों और एजेंडे को लेकर चर्चा तेज हो गई है। माना जा रहा है कि तारिक रहमान की सरकार बनने के बाद भारत और बांग्लादेश के रिश्तों में बदलाव देखने को मिल सकता है। बीते 18 महीनों में मोहम्मद यूनुस सरकार के दौरान दोनों देशों के रिश्ते निचले स्तर पर पहुंच गए थे, लेकिन अब रहमान के एजेंडे और भारत के सकारात्मक रुख से हालात बदलने के संकेत मिल रहे हैं।

नई सरकार को लेकर भारत का संतुलित रुख

एक रिपोर्ट के मुताबिक भारत ने बांग्लादेश की नई सरकार के साथ काम करने को लेकर उम्मीद भी जताई है और सावधानी भी बरती है। बीएनपी का इतिहास भारत के साथ रिश्तों के मामले में बहुत अच्छा नहीं माना जाता, लेकिन पार्टी के मौजूदा चेयरमैन तारिक रहमान (Tariq Rehman) का डेवलपमेंट एजेंडा दोनों देशों के रिश्तों को सामान्य करने का मौका बन सकता है।

Tariq Rehman के चुनाव अभियान पर भारत की नजर

रिपोर्ट के अनुसार भारतीय पक्ष ने रहमान (Tariq Rehman) के चुनाव अभियान पर करीब से नजर रखी। डिप्लोमैटिक सूत्रों के हवाले से कहा गया है कि उनके 31 प्वाइंट एजेंडे में कई ऐसे क्षेत्र हैं, जो भारत और बांग्लादेश के रिश्तों को मजबूत करने में मदद कर सकते हैं। खास तौर पर डिजिटल सेक्टर और इंफ्रास्ट्रक्चर से जुड़े प्लान इसमें अहम माने जा रहे हैं। ब्रिटेन से 17 साल बाद लौटने के बाद तारिक रहमान ने चुनाव अभियान में एंटी इंडिया रुख से दूरी बनाई। दूसरी ओर जमात ए इस्लामी और नेशनल सिटिजन पार्टी के नेताओं ने अपने भाषणों में लगातार इंडिया फैक्टर का जिक्र किया।

डेवलपमेंट एजेंडे और ‘रेनबो नेशन’ की अवधारणा पर जोर

तारिक रहमान (Tariq Rehman) ने चुनाव अभियान के दौरान अपने 31 प्वाइंट प्लान पर ही फोकस रखा। उन्होंने देश को सभी को साथ लेकर चलने वाला रेनबो नेशन बनाने का वादा किया और कट्टरता के खिलाफ कड़ा रुख दिखाया। उन्होंने बंदरगाह और नदी आधारित इंफ्रास्ट्रक्चर डेवलपमेंट, टेक्निकल मॉडर्नाइजेशन और रीजनल तथा इंटरनेशनल ट्रेड बढ़ाने की बात कही।

डिप्लोमैटिक सूत्रों का कहना है कि इंफ्रास्ट्रक्चर डेवलपमेंट, डिजिटलाइजेशन और व्यापार से जुड़े वादों में भारत और बांग्लादेश के बीच सहयोग की संभावनाओं का आकलन किया जा रहा है। इसके अलावा इस साल के आखिर में होने वाले गंगा जल संधि के नवीनीकरण जैसे मुद्दों पर भी दिल्ली में अध्ययन किया जा रहा है।

भारत-बांग्लादेश रिश्तों में तनाव और विकास पर असर

दरअसल हाल के महीनों में भारत और बांग्लादेश के रिश्तों में आई तल्खी का असर बड़े कनेक्टिविटी प्रोजेक्ट्स पर भी पड़ा है। जल बंटवारे जैसे मुद्दों पर भी तनाव देखने को मिला है। माना जा रहा है कि यह हालात तारिक रहमान (Tariq Rehman) के विकास एजेंडे को लागू करने में चुनौती बन सकते हैं। ऐसे में संभावना जताई जा रही है कि वह अपने एजेंडे को आगे बढ़ाने के लिए भारत के साथ सहयोग बढ़ाने की दिशा में कदम उठा सकते हैं।

 

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