होर्मुज का रास्ता बंद, फिर भी नहीं रुकेगा भारत, जानिए उस ‘सीक्रेट’ रूट को जहां से आ रहा है तेल का भंडार!
Sandesh Wahak Digital Desk: मिडिल ईस्ट में युद्ध के कारण कच्चे तेल की कीमतों में आए भारी उछाल और स्ट्रेट ऑफ होर्मुज के रास्ते बाधित होने से भारत ने अपने तेल आयात के स्रोतों में बड़ा बदलाव किया है। रॉयटर्स की ताज़ा रिपोर्ट के अनुसार, भारतीय रिफाइनर अब महंगे होते खाड़ी देशों के तेल के बजाय पश्चिम अफ्रीकी और एशिया-प्रशांत क्षेत्रों की ओर रुख कर रहे हैं।
HPCL की बड़ी खरीदारी: अंगोला से 20 लाख बैरल तेल
भारत की सरकारी तेल कंपनी हिंदुस्तान पेट्रोलियम कॉर्पोरेशन लिमिटेड (HPCL) ने हाल ही में वैश्विक टेंडर के माध्यम से अंगोला से 20 लाख बैरल कच्चा तेल खरीदा है।
सप्लाई: एक्सॉन (Exxon) से ‘क्लोव’ और ‘कैबिंडा’ ग्रेड के 10 लाख बैरल खरीदे गए हैं, जिनकी डिलीवरी 1 से 10 मई के बीच होगी।
बाड़मेर रिफाइनरी: यह तेल राजस्थान स्थित 180,000 बैरल प्रति दिन की क्षमता वाली बाड़मेर रिफाइनरी के लिए मंगाया गया है।
अतिरिक्त खरीद: HPCL ने ट्रेडर ‘टोट्सा’ से भी ‘फोरकाडोस’ और ‘अगबामी’ ग्रेड के 10-10 लाख बैरल तेल की खरीद की है।
मिडिल ईस्ट संकट और भारत पर प्रभाव
होर्मुज का महत्व: भारत अपनी ऊर्जा जरूरतों का 45% मिडिल ईस्ट से पूरा करता था। स्ट्रेट ऑफ होर्मुज बंद होने से विशेषकर LPG की सप्लाई सबसे अधिक प्रभावित हुई है।
आसमान छूती कीमतें: सप्ताह की शुरुआत में ब्रेंट क्रूड की कीमतें 2008 के रिकॉर्ड को पार करते हुए 147.50 के स्तर को छू गई थीं। ओमान और दुबई के बेंचमार्क में आई तेजी ने एशियाई रिफाइनरों की लागत को काफी बढ़ा दिया है।
IOCL की रणनीति: देश की सबसे बड़ी रिफाइनरी इंडियन ऑयल कॉर्पोरेशन (IOC) भी अब पश्चिम अफ्रीका से कच्चे तेल की खरीद के लिए सक्रिय रूप से विकल्प तलाश रही है।
रणनीतिक बदलाव के मायने
भारत अब केवल एक क्षेत्र पर निर्भर रहने के बजाय अपनी ‘एनर्जी बास्केट’ का विस्तार कर रहा है। अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ते तनाव ने भारत को नए रास्तों की तलाश के लिए मजबूर किया है, जिससे भविष्य में मिडिल ईस्ट के घटनाक्रमों का भारत की अर्थव्यवस्था पर प्रभाव कम हो सके।
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