Jalaun News: सांसद नारायणदास के बयान पर आमने-सामने आए दो संगठन, कलेक्ट्रेट पर भारी प्रदर्शन
धानुक समाज ने बताया 'अपमानजनक' तो बसोर समाज ने जताया समर्थन, राष्ट्रपति को संबोधित ज्ञापन सौंपकर कार्रवाई की मांग
Sandesh Wahak Digital Desk: जालौन-गरौठा-भोगनीपुर संसदीय क्षेत्र से समाजवादी पार्टी के सांसद नारायणदास अहिरवार के एक हालिया बयान ने जिले की सियासत में हलचल तेज कर दी है। शनिवार को कलेक्ट्रेट परिसर उस समय अखाड़ा बन गया जब सांसद के बयान के विरोध और समर्थन में दो अलग-अलग सामाजिक संगठन आमने-सामने आ गए। भारी पुलिस बल की मौजूदगी में दोनों पक्षों ने अपनी-अपनी मांग को लेकर सिटी मजिस्ट्रेट को ज्ञापन सौंपा।
“बसोर” शब्द के इस्तेमाल पर भड़का धानुक समाज
भारतीय धानुक समाज के कार्यकर्ताओं ने कलेक्ट्रेट पर जोरदार प्रदर्शन करते हुए सांसद के खिलाफ नारेबाजी की। संगठन के जिलाध्यक्ष सोबरन सिंह कठेरिया ने बताया कि 23 मार्च को संसद सत्र के दौरान सांसद ने अनुसूचित जाति के एक बड़े समुदाय के लिए “बसोर” शब्द का प्रयोग किया, जिसे संगठन अपमानजनक मान रहा है। धानुक समाज ने राष्ट्रपति को संबोधित ज्ञापन सौंपते हुए सांसद के खिलाफ मानहानि और अन्य वैधानिक धाराओं में कार्रवाई की मांग की है।
सांसद ने उठाई वंचितों की आवाज
दूसरी ओर, अखिल भारतीय बसोर समाज विकास समिति के कार्यकर्ता बड़ी संख्या में सांसद के समर्थन में उतर आए। समर्थकों का कहना है कि सांसद ने संसद में अति वंचित ‘बसोर’ जाति के हितों और समस्याओं को प्रमुखता से उठाकर उन्हें सत्ता के गलियारों तक पहुँचाने का सराहनीय कार्य किया है। इस संगठन ने भी सिटी मजिस्ट्रेट को ज्ञापन सौंपकर लापरवाह खंड विकास अधिकारियों (BDO) के खिलाफ कार्रवाई की मांग उठाई।
प्रशासनिक सतर्कता
दोनों पक्षों के प्रदर्शन को देखते हुए कलेक्ट्रेट परिसर में सुरक्षा के कड़े इंतजाम किए गए थे। सिटी मजिस्ट्रेट ने दोनों संगठनों के ज्ञापन स्वीकार किए और उन्हें उचित स्तर पर भेजने का आश्वासन दिया। फिलहाल यह विवाद जालौन की स्थानीय राजनीति में ‘वोट बैंक’ और ‘जातीय अस्मिता’ की नई बहस छेड़ चुका है।
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