RBI के डिप्टी गवर्नर का बयान: AI से बढ़ेगी फाइनेंस में आसानी, लेकिन बरतें सावधानी
Sandesh Wahak Digital Desk: आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) फाइनेंशियल सेक्टर का चेहरा पूरी तरह बदलने वाला है। लेकिन RBI के डिप्टी गवर्ननर स्वामीनाथन जे ने चेतावनी दी है कि अगर इसका इस्तेमाल बिना उचित सुरक्षा कवच के किया गया, तो यह मौजूदा कमजोरियों को और बढ़ा सकता है और नए जोखिम पैदा कर सकता है।
वह तंजावुर के सास्त्रा यूनिवर्सिटी में एक मेमोरियल लेक्चर दे रहे थे। उन्होंने कहा कि हमारा ध्यान सिर्फ फाइनेंस को और अधिक कारगर बनाने पर नहीं होना चाहिए, बल्कि यह भी सुनिश्चित करना जरूरी है कि यह निष्पक्ष (fair), जवाबदेह (accountable) और सबके लिए सुलभ (inclusive) बनी रहे।
AI से क्या होगा फायदा?
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आसान पहुंच: मल्टीलिंग्वल चैटबॉट और वॉयस बेस्ड सिस्टम की मदद से जो लोग अंग्रेजी या औपचारिक दस्तावेजों से परेशान हैं, वे भी बैंकिंग सेवाएं आसानी से ले सकेंगे।
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क्रेडिट की समझ: AI पारंपरिक तरीकों के साथ-साथ ट्रांजैक्शन के ट्रेंड और पेमेंट फ्लो को देखकर उन लोगों को पहचान सकता है जिनका क्रेडिट इतिहास बहुत कम है – जैसे छोटे कारोबारी या पहली बार लोन लेने वाले।
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फ्रॉड पर नजर: बैंकों, क्रेडिट कार्ड नेटवर्क और फाइनेंशियल सिस्टम में मौजूद बड़े डेटा से असामान्य लेनदेन को रीयल टाइम में पकड़ा जा सकता है।
लेकिन क्या हैं चिंताएं?
RBI के डिप्टी गवर्नर ने जोखिमों को लेकर भी साफ शब्द कहे:
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बायस (पक्षपात): AI पुराने डेटा में मौजूद पक्षपात को और बढ़ा सकता है। क्रेडिट असेसमेंट में यह खतरनाक हो सकता है – जहां फैसले ऑब्जेक्टिव दिखते हैं, लेकिन असल में उनमें भेदभाव हो।
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पारदर्शिता की कमी: कुछ AI मॉडल ब्लैक बॉक्स की तरह होते हैं। अगर किसी का लोन रिजेक्ट होता है या कोई ट्रांजैक्शन फ्लैग होता है, तो बैंक को साफ वजह बतानी होगी।
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डेटा की प्राइवेसी: AI को जरूरत होती है बड़े डेटा की, जिसमें संवेदनशील वित्तीय जानकारी भी शामिल है। डिप्टी गवर्नर ने कहा कि डेटा गवर्नेंस को प्राथमिकता बनाना होगा, न कि बाद का विचार।
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मॉडल रिस्क: अगर एक ही AI मॉडल या सप्लायर पर कई संस्थान निर्भर हों, तो गड़बड़ी का असर पूरे सिस्टम पर पड़ेगा।
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साइबर खतरा: AI से जहां एक तरफ बचाव मजबूत होगा, वहीं फ्रॉड करने वाले भी इसका इस्तेमाल फिशिंग या डीपफेक अटैक्स के लिए कर सकते हैं।
RBI के डिप्टी गवर्नर ने दिए 5 सिद्धांत (जिम्मेदार AI के लिए)
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जवाबदेही: फैसला चाहे AI ने भी मदद से लिया हो, जिम्मेदारी संस्थान की होगी।
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निष्पक्षता और स्पष्टता: सिस्टम में ये दोनों जरूर होनी चाहिए।
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मजबूत डेटा गवर्नेंस: डेटा इकट्ठा करने से लेकर स्टोर और सुरक्षा तक हर कदम पर नियंत्रण।
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संगठनात्मक क्षमता: बोर्ड और मैनेजमेंट स्तर तक AI को समझना जरूरी।
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समावेशिता (Inclusion): यह देखना होगा कि AI का असर यह तो नहीं है कि जो लोग पहले से वंचित थे, उनकी पहुंच और मुश्किल हो गई।
अंत में उन्होंने कहा कि फाइनेंस में AI को तीन पैमानों पर परखा जाएगा – क्या यह समावेशिता बढ़ाता है, क्या यह दक्षता सुधारता है, और क्या यह विश्वास (ट्रस्ट) को मजबूत करता है।
उन्होंने साफ कहा कि तकनीकी तरक्की की कीमत इंसानी निर्णय और रिश्तों से नहीं ली जानी चाहिए। बैंकिंग आखिरकार भरोसे पर टिकी है, और नवाचार उसी भरोसे को और मजबूत करे, न कि जवाबदेही या पारदर्शिता को कमजोर।

