QR कोड और WhatsApp ग्रुप के जरिए रची गई नोएडा हिंसा की साजिश, पुलिस कमिश्नर बोलीं- बाहरी फंडिंग की भी होगी जांच
Noida News: नोएडा में वेतन वृद्धि की मांग को लेकर मजदूरों के प्रदर्शन के दौरान हुई हिंसा की घटना में चौंकाने वाले खुलासे हो रहे हैं। पुलिस के अनुसार मजदूरों का यह प्रदर्शन एक सोची समझी साजिश का हिस्सा था। हिंसा के पीछे एक संगठित नेटवर्क का हाथ होने की पुष्टि हुई है। नोएडा पुलिस कमिश्नर लक्ष्मी सिंह ने मंगलवार को बताया कि प्रदर्शनकारियों को जोड़ने के लिए आधुनिक तकनीक जैसे QR कोड स्कैनर और कई गोपनीय WhatsApp ग्रुप्स का सहारा लिया गया था। पुलिस अब इस आंदोलन के पीछे की फंडिंग और विदेशी कनेक्शन की गहराई से पड़ताल कर रही है।
कमिश्नर लक्ष्मी सिंह के अनुसार, पिछले दो दिनों में कई ऐसे वॉट्सऐप ग्रुप सक्रिय हुए जिनमें क्यूआर कोड के माध्यम से श्रमिकों को तेजी से जोड़ा गया। यह दर्शाता है कि भीड़ को इकट्ठा करने और उसे उकसाने के लिए एक सुनियोजित नेटवर्क काम कर रहा था। हिंसा और आगजनी के मामले में अब तक 7 FIR दर्ज की गई हैं और 300 से अधिक उपद्रवियों को गिरफ्तार किया जा चुका है। पुलिस अब इस बात की जांच कर रही है कि क्या इन प्रदर्शनों के लिए राज्य या देश के बाहर से आर्थिक मदद मिली थी।
प्रदर्शन के बाद मजदूर गए, तो बाहरी तत्व आए
पुलिस का दावा है कि सोमवार को नोएडा में 83 जगहों पर करीब 42 हजार श्रमिक मौजूद थे, लेकिन हिंसा केवल दो स्थानों पर हुई। कमिश्नर ने बताया कि जब बातचीत के बाद असली मजदूर वापस लौटने लगे, तब सीमावर्ती जिलों से आए कुछ बाहरी समूहों ने माहौल को हिंसक बनाने की कोशिश की। सीसीटीवी कैमरों के जरिए ऐसे ‘बाहरी तत्वों’ की पहचान की जा रही है।
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