शालीमार बाग में भारी सुरक्षा के बीच चला बुलडोजर, सड़क चौड़ी करने के लिए ढहाए जा रहे 157 मकान

Sandesh Wahak Digital Desk: देश की राजधानी के उत्तर-पश्चिमी इलाके में स्थित शालीमार बाग गांव में आज सुबह से ही प्रशासनिक अमले ने अतिक्रमण के खिलाफ एक बड़ा अभियान छेड़ दिया है। दिल्ली हाईकोर्ट के कड़े रुख के बाद भारी संख्या में पहुंचे बुलडोजरों ने अवैध निर्माणों को ध्वस्त करना शुरू कर दिया है। किसी भी तरह के विरोध या कानून-व्यवस्था बिगड़ने की स्थिति से निपटने के लिए पूरे इलाके को छावनी में तब्दील कर दिया गया है। मौके पर दिल्ली पुलिस के सैकड़ों जवानों के साथ-साथ अर्धसैनिक बलों (पैरामिलिट्री फोर्स) की कंपनियों को तैनात किया गया है।

कानून व्यवस्था बनाए रखने के लिए पुलिस आधुनिक तकनीक का सहारा ले रही है और ड्रोन कैमरों के जरिए आसपास की छतों और गलियों पर पैनी नजर रखी जा रही है। वहीं, बरसों पुराने अपने घरों को मलबे में तब्दील होता देख स्थानीय लोग बेबसी के आंसू रो रहे हैं और सड़कों पर सामान समेटते नजर आ रहे हैं।

दरअसल, दिल्ली हाईकोर्ट ने शालीमार बाग गांव के पास ट्रैफिक जाम की समस्या को खत्म करने और सड़क को चौड़ा करने के मकसद से 157 अवैध मकानों को 30 मई तक ढहाने का साफ आदेश दिया था। गौरतलब है कि शालीमार बाग का यह इलाका दिल्ली के राजनीतिक नक्शे में भी खासा महत्व रखता है।

600 से अधिक परिवार हुए बेघर

प्रशासन की इस कार्रवाई से प्रभावित हुए स्थानीय निवासियों का दर्द छलक उठा है। लोगों का कहना है कि इन इमारतों में लगभग 600 से ज्यादा परिवार और करीब 6 हजार लोग रहते हैं, जो इस अचानक हुई तोड़फोड़ से एक ही झटके में पूरी तरह बेघर हो गए हैं। निवासियों का दावा है कि वे यहाँ पिछले 50 से अधिक वर्षों से शांतिपूर्ण ढंग से रह रहे हैं और उनके पास जमीन व संपत्ति से जुड़े कानूनी और जायज दस्तावेज भी मौजूद हैं।

‘घर बचाओ आंदोलन समिति’ के संयोजक मुकेश कुमार पासवान ने बताया कि इस कार्रवाई को रुकवाने के लिए उन्होंने सरकार से लेकर स्थानीय प्रशासन के दफ्तरों के कई चक्कर काटे। महिलाओं और बुजुर्गों ने अपने आशियानों को बचाने के लिए लंबे समय तक धरना प्रदर्शन किया और क्रमिक भूख हड़ताल भी की, लेकिन अदालत के सख्त आदेश के आगे उनकी एक न सुनी गई। प्रभावित लोगों के मुताबिक, प्रशासन की ओर से उन्हें शालीमार बाग से करीब 30-35 किलोमीटर दूर घेवरा इलाके में ‘डूसिब’ (DUSIB) द्वारा बनाए गए फ्लैटों में 11 महीने के रेंट के आधार पर शिफ्ट होने का विकल्प दिया जा रहा है, जो उनके रोजगार और बच्चों की पढ़ाई के लिहाज से काफी दूर है।

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