सुरक्षा में कटौती से नाराज लालू-राबड़ी और तेजस्वी ने लौटाई अपनी पूरी सिक्योरिटी
Sandesh Wahak Digital Desk: बिहार की सियासत में इन दिनों वीआईपी सुरक्षा को लेकर घमासान चरम पर पहुंच गया है। राज्य सरकार द्वारा सुरक्षा व्यवस्था में की गई कटौती से नाराज होकर पूर्व मुख्यमंत्री लालू प्रसाद यादव और राबड़ी देवी ने अपने सरकारी आवास से सभी सुरक्षाकर्मियों को वापस भेज दिया है। इस फैसले के बाद पटना के 10, सर्कुलर रोड स्थित राबड़ी आवास के बाहर पूरी तरह सन्नाटा पसरा हुआ है। इतना ही नहीं, बिहार विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष तेजस्वी यादव के आवास से भी सुरक्षा घेरा हटा दिया गया है। बता दें कि तेजस्वी यादव को नेता प्रतिपक्ष के नाते ‘Y प्लस’ श्रेणी की सुरक्षा मिली हुई थी। तेजस्वी आज दिल्ली से पटना वापस लौट रहे हैं, जिसके बाद इस सियासी विवाद के और तूल पकड़ने के आसार हैं।
राष्ट्रीय जनता दल (RJD) के मुख्य प्रवक्ता शक्ति यादव ने इस कदम की पुष्टि करते हुए बताया कि शनिवार सुबह ही सभी सुरक्षाकर्मियों को वापस भेजने का कड़ा निर्णय लिया गया। उन्होंने स्पष्ट किया कि सरकार द्वारा दुर्भावनापूर्ण तरीके से सुरक्षा घटाए जाने के विरोध में यह कदम उठाया गया है। राजद आलाकमान के इस फैसले के बाद पार्टी कार्यकर्ताओं में भारी आक्रोश है और वे बड़ी संख्या में राबड़ी आवास के बाहर इकट्ठा होने लगे हैं। पार्टी नेताओं का साफ कहना है कि अगर सरकार सुरक्षा नहीं दे सकती, तो अब राजद के समर्पित कार्यकर्ता ही अपने नेताओं की सुरक्षा की कमान संभालेंगे।
नीतीश कुमार की सुरक्षा पर उठाए सवाल
प्रवक्ता शक्ति यादव ने मुख्यमंत्री नीतीश कुमार को मिली ‘जेड प्लस’ (Z+) सुरक्षा व्यवस्था पर भी कड़े सवाल खड़े किए। उन्होंने पूछा कि जब विपक्ष के प्रमुख नेताओं की सुरक्षा घटाई जा रही है, तो नीतीश कुमार की सुरक्षा वापस क्यों नहीं ली जा रही? राजद ने आरोप लगाया कि मौजूदा सरकार जननेता लालू यादव की सुरक्षा के साथ खिलवाड़ करने की साजिश रच रही है।
शक्ति यादव ने कहा, लालू प्रसाद महज एक नेता नहीं बल्कि एक विचारधारा हैं, जिससे सीखकर कई लोगों ने देश की राजनीति में मुकाम पाया है। सरकार का यह कदम राजनीतिक शुचिता का हनन है। अगर हमारे नेताओं को एक खरोंच भी आई, तो पैदा होने वाले जन-आक्रोश को संभालना सरकार के बस में नहीं होगा। इस पूरे मामले में जहां राजद पूरी तरह आक्रामक है, वहीं भारतीय जनता पार्टी सरकार के इस फैसले के बचाव में उतर आई है।
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