Fatty Liver बना साइलेंट खतरा! हर तीसरा भारतीय चपेट में, SGPGI के डॉक्टरों ने दी बड़ी चेतावनी

Lucknow News: फैटी लिवर (Fatty Liver) की बीमारी देश में तेजी से बढ़ती स्वास्थ्य चुनौती बनती जा रही है और इसका गंभीर रूप नैश यानी नॉन-अल्कोहलिक स्टीटो-हेपेटाइटिस लाखों लोगों को प्रभावित कर रहा है। ग्लोबल नैश दिवस के अवसर पर SGPGI में आयोजित कार्यक्रम में विशेषज्ञों ने बताया कि भारत में हर तीसरा व्यक्ति फैटी लिवर से पीड़ित है तथा बढ़ता मोटापा और डायबिटीज इसके प्रमुख कारण हैं। चिकित्सकों ने चेतावनी दी कि समय रहते पहचान और उपचार नहीं होने पर यह बीमारी सिरोसिस और लिवर कैंसर का रूप ले सकती है।

ग्लोबल नैश दिवस के अवसर पर गुरुवार को SGPGI के हेपेटोलॉजी विभाग द्वारा जागरूकता कार्यक्रम आयोजित किया गया। कार्यक्रम का उद्घाटन SGPGI के डीन प्रो. शालीन कुमार, हेपेटोलॉजी विभागाध्यक्ष प्रो. अमित गोयल, केजीएमयू के गैस्ट्रोएंटरोलॉजी विभागाध्यक्ष प्रो. सुमित रुंगटा, बीएचयू-आईएमएस के प्रो. देवेश यादव तथा जीएसवीएम मेडिकल कॉलेज कानपुर के प्रो. विनय कुमार ने किया।

विशेषज्ञों ने कहा कि भारत में Fatty Liver रोग तेजी से बढ़ रहा है और देश के मोटापा एवं डायबिटीज की वैश्विक राजधानी बनने के साथ-साथ फैटी लिवर रोग का बोझ भी लगातार बढ़ रहा है। उन्होंने इस बीमारी की शीघ्र पहचान और समय पर उपचार को आवश्यक बताते हुए लोगों से नियमित स्वास्थ्य जांच कराने की अपील की।

Fatty Liver बना साइलेंट खतरा! हर तीसरा भारतीय चपेट में, SGPGI के डॉक्टरों ने दी बड़ी चेतावनी

SGPGI के निदेशक पद्मश्री प्रो. आर.के. धीमन ने कहा कि नैश जिसे अब मेटाबोलिक डिसफंक्शन-एसोसिएटेड स्टीटोहेपेटाइटिस भी कहा जाता है, मुख्य रूप से जीवनशैली से जुड़ी बीमारी है। उन्होंने बताया कि अधिक वजन, शारीरिक निष्क्रियता और असंतुलित खानपान इसके प्रमुख कारण हैं। नियमित व्यायाम, संतुलित आहार और स्वस्थ वजन बनाए रखकर इस बीमारी से बचाव किया जा सकता है।

कार्यक्रम के दौरान हेपेटोलॉजी विभाग के डॉ. अजय कुमार मिश्रा और डॉ. सुरेंद्र सिंह ने पोस्टग्रेजुएट क्विज प्रतियोगिता का आयोजन किया, जिसमें प्रदेशभर से 100 से अधिक युवा चिकित्सकों ने भाग लिया। प्रतिभागियों को Fatty Liver रोग एवं नैश के निदान और उपचार संबंधी व्यावहारिक प्रशिक्षण भी दिया गया।

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