धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे पर सपा कार्यालय के बाहर लगी होर्डिंग, छात्र आंदोलन को बताया ऐतिहासिक जीत

Lucknow News: केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे के बाद उत्तर प्रदेश की राजधानी में सियासी माहौल गर्म हो गया है। रविवार को सपा प्रदेश मुख्यालय के बाहर विक्रमादित्य मार्ग पर एक बड़ी होर्डिंग लगाई गई, जिसमें इस इस्तीफे को छात्रों के ऐतिहासिक आंदोलन और जनशक्ति की बड़ी जीत बताया गया। इस होर्डिंग के जरिए पार्टी ने आंदोलन को सफल बनाने में रात-दिन एक करने वाले छात्रों, कार्यकर्ताओं, पदाधिकारियों और आम जनता के प्रति आभार व्यक्त किया है।

होर्डिंग में सपा मुखिया और सांसद को मिला धन्यवाद

सपा मुख्यालय के बाहर लगी होर्डिंग में विशेष रूप से पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव और सांसद डिंपल यादव के कुशल नेतृत्व व सहयोग के लिए आभार प्रकट किया गया है। होर्डिंग के जरिए यह संदेश भी दिया गया है कि जनहित, युवाओं के अधिकारों और न्याय की लड़ाई में समाजवादी पार्टी आगे भी पूरी मजबूती के साथ संघर्ष करती रहेगी।

बता दें कि सपा नेतृत्व शुरू से ही NEET पेपर लीक और अन्य परीक्षाओं में गड़बड़ी को लेकर छात्रों के आंदोलन का समर्थन कर रहा था। अखिलेश यादव ने संसद में इस मुद्दे को जोरदार तरीके से उठाया था, वहीं डिंपल यादव 20 जुलाई को जंतर-मंतर पर घायल छात्रों से मिलने भी पहुंची थीं।

होर्डिंग में छात्र आंदोलन की सफलता का श्रेय जनता, युवाओं और समाजवादी कार्यकर्ताओं के संयुक्त प्रयासों को दिया गया है। इसे ‘लोकतांत्रिक संघर्ष की बड़ी विजय’ बताया गया है और आम जनता के सहयोग को पार्टी की सबसे बड़ी ताकत बताया गया है। धन्यवाद पत्र के रूप में लगाई गई इस होर्डिंग में भविष्य में भी सामाजिक सरोकारों और जनहित से जुड़े मुद्दों पर लगातार आवाज उठाने का संकल्प भी दोहराया गया है। यह पोस्टर पार्टी की उस रणनीति को भी दिखाता है, जिसमें वह खुद को छात्रों और युवाओं के पक्षधर के रूप में पेश कर रही है।

सपा नेता हल्लूराम सुंदर यादव ने लगवाई होर्डिंग

जानकारी के अनुसार, यह होर्डिंग प्रतापगढ़ से सपा नेता हल्लूराम सुंदर यादव ने लगवाई है। उन्होंने इस कदम को आंदोलन की सफलता का जश्न मनाने और उन सभी लोगों का सम्मान करने के रूप में बताया, जिन्होंने इस न्याय की लड़ाई में योगदान दिया। इस होर्डिंग के बाद से प्रदेश के राजनीतिक गलियारों में चर्चाएं तेज हो गई हैं। विपक्षी दलों के साथ-साथ सत्तारूढ़ दल के नेताओं की नजरें भी इस पर टिकी हैं।

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