महाकुंभ 2025 के ऐतिहासिक प्रबंधन पर लिखी किताब का लखनऊ में विमोचन

Lucknow News: साल 2025 में आयोजित महाकुंभ के दौरान 66 करोड़ से अधिक श्रद्धालुओं की रिकॉर्ड तोड़ भागीदारी और उसके सटीक प्रशासनिक प्रबंधन को अब एक प्रामाणिक पुस्तक का रूप दे दिया गया है। शनिवार को लखनऊ के गोमतीनगर स्थित एक होटल में “महाकुंभ 2025, श्रद्धालु 66 करोड़ के पार” नामक पुस्तक का भव्य विमोचन किया गया। प्रयागराज के मूल निवासी डॉ. गोविंद कुमार सक्सेना द्वारा लिखित इस पुस्तक में महाकुंभ को महज एक धार्मिक मेले के रूप में नहीं, बल्कि आस्था, संस्कृति, सुशासन और बेजोड़ सामाजिक सहभागिता के एक अनूठे मॉडल के रूप में पेश किया गया है।

आने वाली पीढ़ियों के लिए महत्वपूर्ण संदर्भ सामग्री

विमोचन समारोह के मुख्य अतिथि और पटना उच्च न्यायालय के न्यायाधीश, न्यायमूर्ति संजय कुमार सिंह ने कार्यक्रम को संबोधित करते हुए कहा कि महाकुंभ भारत की सनातनी परंपरा, सांस्कृतिक चेतना और सामाजिक समरसता का जीवंत प्रतीक है। उन्होंने कहा कि इतने बड़े स्तर के ऐतिहासिक आयोजनों का प्रामाणिक दस्तावेजीकरण होना बेहद जरूरी है, ताकि आने वाली पीढ़ियों को इससे सीखने और शोध करने का अवसर मिल सके। लेखक डॉ. गोविंद कुमार सक्सेना ने इस पुस्तक के जरिए महाकुंभ के सूक्ष्म आयामों को संकलित कर एक सराहनीय कार्य किया है। इस पूरे गरिमामयी कार्यक्रम का कुशल संचालन प्रख्यात कवि और लॉ प्रोफेसर डॉ. श्लेष गौतम ने किया।

जब सुशासन और टेक्नोलॉजी मिले, तो संभव हुआ

कार्यक्रम के अध्यक्षीय अतिथि और लखनऊ मंडल के आयुक्त विजय विश्वास पंत (IAS) ने अपने संबोधन में कहा कि महाकुंभ 2025 ने दुनिया के सामने यह साबित कर दिया कि जब सुशासन, अत्याधुनिक तकनीक और जनसहयोग एक साथ मिलते हैं, तो दुनिया के सबसे बड़े प्रबंधन को भी सुगम और सुरक्षित बनाया जा सकता है।

इस मौके पर पुस्तक के लेखक डॉ. गोविंद कुमार सक्सेना भावुक नजर आए। उन्होंने कहा, इस पुस्तक को लिखने के दौरान मैंने सैकड़ों श्रद्धालुओं की अद्भुत कहानियां सुनीं और उनकी अटूट आस्था को करीब से महसूस किया। यह किताब इसी दिव्य यात्रा का एक जीवंत दस्तावेज है, जो यह दर्शाती है कि आस्था के सूत्र में बंधकर करोड़ों लोग कैसे एक परिवार बन जाते हैं।

महाकुंभ 2025 के ऐतिहासिक प्रबंधन पर लिखी किताब का लखनऊ में विमोचन

समारोह में कई नामचीन हस्तियों की रही उपस्थिति

इस ऐतिहासिक विमोचन के अवसर पर न्याय, प्रशासन, पत्रकारिता और अध्यात्म जगत के कई बड़े चेहरे एक मंच पर नजर आए, जिनमें मुख्य रूप से शामिल थे।

उदय प्रताप सिंह: उत्तर प्रदेश सरकार के प्रमुख सचिव (न्याय) एवं विधिक परामर्शी (अति विशिष्ट अतिथि)।

रतन मणि लाल: वरिष्ठ पत्रकार एवं पूर्व संपादक (विशिष्ट अतिथि)।

महामंडलेश्वर श्री मां योग योगेश्वरी यति जी: पंचदशनाम जूना अखाड़ा, महाशक्ति पीठ कल्याणपुर, कानपुर (विशिष्ट अतिथि)।

हिंमाशु शेखर: इलाहाबाद उच्च न्यायालय के वरिष्ठ अधिवक्ता (मानद अतिथि)।

इसके अलावा समारोह में बड़ी संख्या में साहित्यकार, शिक्षाविद, प्रशासनिक अधिकारी, सामाजिक कार्यकर्ता और प्रबुद्धजन उपस्थित रहे, जिन्होंने इस ऐतिहासिक दस्तावेजीकरण की खुले दिल से सराहना की।

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