राम मंदिर चंदा चोरी कांड: CCTV ने खोला राज, 39 दिनों में हुई चोरी की 70 कोशिशें
Ayodhya News: उत्तर प्रदेश के अयोध्या में राम मंदिर के चढ़ावे और चंदे में हुई कथित हेराफेरी की परतों को जैसे-जैसे विशेष जांच दल (SIT) खंगाल रहा है, वैसे-वैसे बेहद सनसनीखेज खुलासे हो रहे हैं। एसआईटी की जांच टीम ने जब मंदिर परिसर के भीतर लगे सीसीटीवी कैमरों की फुटेज को खंगाला, तो सुरक्षा और प्रबंधन को लेकर एक बेहद हैरान करने वाला सच सामने आया। सूत्रों के मुताबिक, महज 39 दिनों के भीतर यानी 27 अप्रैल से 5 जून के बीच काउंटिंग रूम में चोरी की 70 बार कोशिशें की गईं।
कैमरे में बार-बार दिखा मुख्य आरोपी, फिर भी बंद रहीं आंखें
सीसीटीवी फुटेज के विश्लेषण से यह बात साफ हुई है कि गिरफ्तार आरोपियों में से एक, मनीष कुमार यादव को कई मौकों पर दान राशि में हाथ साफ करने की कोशिश करते हुए साफ देखा जा सकता है। चौंकाने वाली बात यह है कि कैमरों की लाइव निगरानी के बावजूद उस समय आरोपी के खिलाफ कोई तत्काल विभागीय या कानूनी कार्रवाई नहीं की गई, जिससे मंदिर प्रबंधन की सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं।
तीन साल के इंटरनल ऑडिट में मिलीं गंभीर वित्तीय कमियां
एसआईटी के वित्तीय विशेषज्ञों ने इस महाघोटाले की जड़ तक जाने के लिए पिछले तीन वित्तीय वर्षों की आंतरिक ऑडिट रिपोर्ट को अपने कब्जे में लिया है।
वित्तीय वर्ष: 2022-23, 2023-24 और 2024-25 की इंटरनल ऑडिट रिपोर्ट खंगालने पर कई बड़ी प्रक्रियात्मक (Procedural) कमियां और नियमों का उल्लंघन पाया गया है।
कमजोर आंतरिक नियंत्रण: जांच टीम ने अपनी रिपोर्ट में स्पष्ट किया है कि मंदिर का ‘इंटरनल कंट्रोल सिस्टम’ बेहद लचर और कमजोर था। दान में मिली बड़ी रकम की गिनती और उसे सुरक्षित रखने के दौरान सुरक्षा मानकों (SOP) को पूरी तरह नजरअंदाज किया गया।
अस्पष्ट जवाबदेही: रिपोर्ट के अनुसार, रिकॉर्ड-कीपिंग (दस्तावेजों के रखरखाव) की स्थिति बेहद खराब थी। सबसे बड़ी लापरवाही यह रही कि सुपरवाइजरी यानी पर्यवेक्षक स्तर पर अधिकारियों की जवाबदेही को लेकर कोई स्पष्ट नीति या नियम तय नहीं थे। इसी प्रशासनिक ढिलाई का फायदा उठाकर इस सिंडिकेट ने इतने बड़े फ्रॉड को अंजाम दिया।
रडार पर कई और नाम, बढ़ सकती है गिरफ्तारियों की संख्या
इस मामले में पुलिस अब तक 8 मुख्य आरोपियों को सलाखों के पीछे भेज चुकी है। इनमें रामजन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के पूर्व महासचिव चंपत राय के बेहद करीबी रमाशंकर यादव उर्फ टिन्नू यादव सहित लव कुश मिश्रा, अनुकल्प मिश्रा, अविनाश शुक्ला, करुणेश पांडे, रमा शंकर मिश्रा और सुभाष श्रीवास्तव शामिल हैं। सूत्रों का कहना है कि एसआईटी अब कड़ियों को जोड़कर कुछ और बड़े चेहरों की पहचान कर रही है, और जल्द ही इस मामले में कुछ और चौंकाने वाली गिरफ्तारियां देखने को मिल सकती हैं।
Also Read: शशि थरूर ने पासपोर्ट-नागरिकता विवाद में सरकार को घेरा, आधार कार्ड पर दिया सुझाव

