इलाहाबाद हाई कोर्ट ने ग्राम प्रधानों को प्रशासक नियुक्त करने पर जताई नाराजगी, यूपी सरकार से मांगा जवाब
Prayagraj News: इलाहाबाद हाई कोर्ट ने उत्तर प्रदेश सरकार द्वारा त्रिस्तरीय पंचायतों के कार्यकाल समाप्त होने के बाद ग्राम प्रधानों को ही प्रशासक नियुक्त करने के फैसले को अदालत की अवमानना बताते हुए कड़ी टिप्पणी की है। कोर्ट ने कहा कि प्रशासक नियुक्त करना डिवीजन बेंच के आदेश का उल्लंघन है और ऐसी इजाजत नहीं दी जा सकती।
क्या है पूरा मामला
उत्तर प्रदेश में पंचायतों का कार्यकाल 26 मई, 2026 को समाप्त हो गया था। इसके बाद राज्य सरकार ने आदेश जारी कर ग्राम प्रधानों को ही प्रशासक के रूप में नियुक्त कर दिया। इस फैसले को याचिकाकर्ता अरविंद राठौर ने हाई कोर्ट में चुनौती दी, जिसमें प्रशासकों को हटाकर त्रिस्तरीय पंचायत चुनाव कराने की मांग की गई है।
जस्टिस सिद्धार्थ नंदन की सिंगल बेंच ने शुक्रवार को सुनवाई करते हुए कहा कि प्रधानों को प्रशासक रूप में बने रहने की इजाजत नहीं दी जा सकती। कोर्ट ने स्पष्ट किया कि प्रशासक नियुक्त करना डिवीजन बेंच के पिछले आदेश का उल्लंघन है, जो अदालत की अवमानना की श्रेणी में आता है।
हाई कोर्ट ने राज्य सरकार को अंतिम अवसर के रूप में ओबीसी आयोग की रिपोर्ट को रिकॉर्ड पर लाने के लिए एक विस्तृत हलफनामा दाखिल करने का निर्देश दिया है। कोर्ट ने कहा कि अगर सरकार ने कोई आयोग गठित किया है, तो उसकी जानकारी और अन्य विवरण कोर्ट में पेश करें, जिसमें चुनाव कराने की समय सीमा स्पष्ट रूप से बताई गई हो। मामले की अगली सुनवाई 13 जुलाई, 2026 को दोपहर 2:00 बजे होगी।
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