गर्मी, बिजली और EL Nino… भारत के सामने खड़ी हुई डबल मुसीबत, रिपोर्ट में चौंकाने वाला खुलासा

EL Nino Effect: एल नीनो को लेकर तेज हो रही चर्चाओं और चिंताओं के बीच अब एक चौंकाने वाली रिपोर्ट सामने आई है, जिसने देशभर की चिंताओं को सातवें आसमान पर पहुंचा दिया है। इस बात को ऐसे समझिए कि हाल में प्रकाशित ‘सेंटर फॉर रिसर्च ऑन एनर्जी एंड क्लीन एयर’ (CREA) की एक नई रिपोर्ट के मुताबिक, इस साल आने वाले एल नीनो मौसम चक्र का सबसे बुरा असर भारत के बिजली सिस्टम पर पड़ सकता है।

बता दें कि एल नीनो एक ऐसा मौसमी बदलाव है, जिससे दुनिया भर में गर्मी और तापमान काफी बढ़ जाता है। ऐसे में अब भारत के सामने दोहरी चुनौती है। आइए जानते हैं चुनौतियां क्या-क्या है।

भारत के सामने दो चुनौती क्या-क्या?

बात अगर चुनौतियों की करें तो एक तरफ EL Nino Effect के कारण हवा की रफ्तार कम होगी और बारिश घटने से पनबिजली और पवन ऊर्जा का उत्पादन कम हो जाएगा। दूसरी तरफ, भयंकर गर्मी के कारण देश में एयर कंडीशनर (AC) चलाने के लिए बिजली की मांग आसमान छूने लगेगी।

रिपोर्ट में मुख्य और चिंताजनक बातें

रिपोर्ट में एल नीनो से भारत पर पड़ने वाले असर और चिंताओं को विस्तार से बताया गया है। इस बात पर जोर दिया गया है कि गर्मी बढ़ने से अगले एक साल में केवल कूलिंग (AC और पंखे) के लिए 10 टीडब्ल्यूएच (TWh) अतिरिक्त बिजली की जरूरत पड़ सकती है।

यह पूरी दिल्ली में साल भर में इस्तेमाल होने वाली बिजली के एक-चौथाई के बराबर है। वहीं इससे एक तरफ ग्रीन एनर्जी का उत्पादन घटेगा और दूसरी तरफ मांग बढ़ेगी। इस वजह से देश में करीब 18 टीडब्ल्यूएच बिजली की भारी कमी हो सकती है।

EL Nino effect से प्रदूषण भी बढ़ेगा

अब इस कमी को पूरा करने के लिए भारत को कोयले से बनने वाली बिजली पर निर्भर होना पड़ेगा। अनुमान है कि इससे करीब 1.7 करोड़ टन अतिरिक्त कार्बन डाइऑक्साइड (CO2) गैस निकलेगी, जो पर्यावरण के लिए बेहद नुकसानदेह है। गंभीर स्थिति होने पर कोयले की खपत और ज्यादा बढ़ सकती है।

ध्यान देने वाली बात यह है कि भारत पहले ही इस साल रिकॉर्ड तोड़ गर्मी और जानलेवा हीटवेव झेल रहा है, जिसने बिजली की मांग को 270 गीगावाट (GW) के अब तक के सबसे ऊंचे स्तर पर पहुंचा दिया था। ऐसे में अब ‘सुपर एल नीनो’ के आने से ग्रिड पर दबाव और ज्यादा बढ़ जाएगा। इससे न सिर्फ बिजली का संकट होगा, बल्कि पानी की किल्लत और खेती पर भी बुरा असर पड़ेगा।

इस बात को ऐसे समझिए कि अक्सर बिजली की बढ़ती मांग को पूरा करने के लिए नए कोयला प्लांट लगाने की वकालत की जाती है। लेकिन भारत के कोयला प्लांट इस मांग को पूरी तरह संभालने में लचीले नहीं हैं। रिपोर्ट के मुताबिक, पिछले साल कोयला प्लांटों को चालू रखने के चक्कर में ग्रिड ऑपरेटरों को करीब 2.1 टीडब्ल्यूएच सौर और पवन ऊर्जा को बर्बाद करना पड़ा था।

अब समझिए समाधान क्या है?

EL Nino के संकट से बचने का सबसे अच्छा रास्ता सौर ऊर्जा है। दिन के समय भारत की 24% बिजली की मांग अकेले सौर ऊर्जा से पूरी हो रही है। खास बात यह है कि एल नीनो का सौर ऊर्जा के उत्पादन पर कोई बुरा असर नहीं पड़ता है।

गौरतलब है कि रिपोर्ट में कहा गया है कि भारत को साल 2030 तक 500 गीगावाट गैर-फॉसिल बिजली बनाने के अपने लक्ष्य पर टिके रहना होगा। साथ ही, देश को बड़े पैमाने पर बैटरी स्टोरेज और ग्रिड को अपग्रेड करने का काम तेजी से करना होगा, ताकि भविष्य में आने वाले ऐसे मौसमी संकटों से निपटा जा सके।

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