सुरक्षा घटने पर लालू यादव बोले- मैं बिहार का शेर हूँ, मुझे किसी का डर नहीं

Sandesh Wahak Digital Desk: राष्ट्रीय जनता दल (आरजेडी) के सुप्रीमो और बिहार के पूर्व मुख्यमंत्री लालू प्रसाद यादव ने अपनी सुरक्षा में की गई कटौती को लेकर बड़ा बयान दिया है। सुरक्षा स्तर कम किए जाने पर मचे सियासी घमासान के बीच मंगलवार को लालू यादव ने तमाम चिंताओं को खारिज करते हुए बेहद आक्रामक अंदाज में कहा, मैं बिहार का शेर हूँ और मुझे सुरक्षा कम होने से कोई फर्क नहीं पड़ता। जब उनसे बिहार के उपमुख्यमंत्री सम्राट चौधरी द्वारा लगातार बनाए जा रहे राजनीतिक निशाने को लेकर सवाल किया गया, तो उन्होंने बेबाकी से जवाब दिया, उन्हें निशाना बनाने दो, इससे मुझे कोई समस्या नहीं है।

नीतीश कुमार की खामोशी पर कसा तंज

सुरक्षा में कटौती के इस संवेदनशील मामले पर बिहार के पूर्व मुख्यमंत्री नीतीश कुमार की चुप्पी को लेकर जब आरजेडी प्रमुख से सवाल पूछा गया, तो उन्होंने चुटकी लेते हुए कहा, हाँ, इस समय हर कोई चुप बैठा है। वहीं, दूसरी तरफ जब उनसे पूछा गया कि क्या बिहार विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष तेजस्वी यादव पार्टी की कमान को सही ढंग से संभाल रहे हैं? इस पर आरजेडी सुप्रीमो ने पूरे भरोसे के साथ कहा, हाँ, तेजस्वी पार्टी को बहुत ही शानदार और प्रभावी तरीके से आगे बढ़ा रहे हैं। इसमें दूर-दूर तक कोई समस्या या शक नहीं है।

निजी आवास में शिफ्ट हुआ लालू का परिवार

लालू यादव का यह बड़ा बयान ऐसे समय में आया है जब बिहार की राजनीति का सबसे हाई-प्रोफाइल ठिकाना माना जाने वाला पटना का 10 सर्कुलर रोड स्थित सरकारी बंगला खाली हो चुका है। पूर्व मुख्यमंत्री राबड़ी देवी करीब 20 साल तक इस बंगले में रहने के बाद इसे पूरी तरह खाली कर अपने पति लालू यादव के साथ कौटिल्य नगर स्थित अपने निजी आवास में शिफ्ट हो गई हैं। बता दें कि राबड़ी देवी को यह बंगला 2 फरवरी 2006 को विपक्ष की नेता रहने के दौरान आवंटित हुआ था, जो पिछले दो दशकों से बिहार की राजनीति और आरजेडी का मुख्य पावर सेंटर बना हुआ था। इसी बंगले में ‘इंडिया’ गठबंधन समेत कई बड़ी राजनीतिक रणनीतियों को अमलीजामा पहनाया गया था।

सरकारी आवास खाली करने से पहले पूर्व मुख्यमंत्री राबड़ी देवी ने भविष्य में किसी भी तरह की कानूनी या राजनीतिक खींचतान से बचने के लिए एक बड़ा कदम उठाया था। उन्होंने भवन निर्माण विभाग को पत्र लिखकर साल 2006 में आवास आवंटन के समय तैयार की गई मूल इन्वेंट्री (सामान की आधिकारिक सूची) और फीस रजिस्टर की मांग की थी। हालांकि, सूत्रों के मुताबिक विभाग ने अभी तक यह सूची उपलब्ध नहीं कराई है। राबड़ी देवी का तर्क था कि सरकारी संपत्ति को सौंपने से पहले सामान का मिलान बेहद जरूरी है ताकि बाद में विपक्षी दल किसी तरह के बेबुनियाद आरोप न लगा सकें। फिलहाल, इस मामले के लंबित रहने के बावजूद लालू परिवार ने बंगला खाली कर दिया है।

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