डिप्रेशन और नींद की परेशानी का नया इलाज, लाइट थेरेपी कैसे बदल रही है लोगों की ज़िंदगी
Light Therapy: आज की तेज़ रफ्तार ज़िंदगी में डिप्रेशन और नींद से जुड़ी समस्याएं तेजी से बढ़ रही हैं। देर रात तक जागना, सुबह थकान, मन का उदास रहना और छोटी-छोटी बातों पर चिड़चिड़ापन अब आम समस्या बन गई है। ऐसे में हाल के वर्षों में लाइट थेरेपी नाम की तकनीक पर दुनियाभर में ध्यान दिया जा रहा है, जो मूड सुधारने और नींद की गुणवत्ता बेहतर करने में मदद कर सकती है।
क्या है लाइट थेरेपी और कैसे करती है काम
लाइट थेरेपी एक आधुनिक उपचार पद्धति है, जिसमें व्यक्ति को तय समय तक तेज़ कृत्रिम रोशनी के सामने बैठाया जाता है। इसके लिए खास लाइट थेरेपी बॉक्स का इस्तेमाल होता है, जो प्राकृतिक धूप जैसी रोशनी देता है।
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National Institute of Mental Health के अनुसार, यह थेरेपी खासतौर पर सीज़नल एफेक्टिव डिसऑर्डर (SAD) में कारगर पाई गई है, जो मौसम बदलने पर होने वाला डिप्रेशन है। इसका मुख्य उद्देश्य शरीर की जैविक घड़ी यानी सर्कैडियन रिद्म को सही करना होता है, जो हमारे सोने-जागने के समय को नियंत्रित करती है।
नींद, हार्मोन और दिमाग पर असर
हमारा दिमाग रोशनी के प्रति बेहद संवेदनशील होता है। Harvard Medical School के अनुसार, सुबह की तेज़ रोशनी मेलाटोनिन और सेरोटोनिन जैसे हार्मोन को संतुलित करती है। मेलाटोनिन नींद लाने में मदद करता है, जबकि सेरोटोनिन मूड को बेहतर बनाता है। रोशनी की कमी से इनका संतुलन बिगड़ सकता है, जिससे नींद और मानसिक स्वास्थ्य दोनों प्रभावित होते हैं।

डिप्रेशन, स्लीप डिसऑर्डर और अल्जाइमर में राहत
कई अध्ययनों में पाया गया है कि लाइट थेरेपी से डिप्रेशन के लक्षण कम हो सकते हैं। खासकर उन लोगों में, जो इनसोम्निया, स्लीप डिसऑर्डर या अल्जाइमर से परेशान हैं। Mayo Clinic के अनुसार, इसका सुरक्षित लाभ लेने के लिए प्रमाणित डिवाइस का ही उपयोग करना चाहिए और किसी भी बीमारी की स्थिति में डॉक्टर की सलाह ज़रूरी है।

