देश में लगातार घट रहे सरकारी स्कूल, 10 साल के आंकड़ों ने बढ़ाई चिंता, जानिए पूरी रिपोर्ट

Government schools in India: देश में शिक्षा व्यवस्था को लेकर संसद के मॉनसून सत्र में जमकर चर्चा हुई। समाजवादी पार्टी प्रमुख अखिलेश यादव ने केंद्र सरकार पर एक लाख से ज्यादा सरकारी स्कूल बंद करने का आरोप लगाया, जिसके बाद सरकार ने लोकसभा में इस मुद्दे पर जवाब दिया।

केंद्र सरकार ने साफ किया कि स्कूलों को खोलने, बंद करने या दूसरे स्कूलों में मर्ज करने का फैसला राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों के अधिकार क्षेत्र में आता है। हालांकि शिक्षा मंत्रालय की ओर से पेश किए गए UDISE+ आंकड़ों से यह जरूर सामने आया कि बीते कुछ वर्षों में सरकारी स्कूलों की संख्या में कमी दर्ज की गई है।

वहीं दूसरी तरफ उच्च शिक्षा के क्षेत्र में विस्तार देखने को मिला है। AISHE के आंकड़ों के मुताबिक देश में विश्वविद्यालयों और कॉलेजों की संख्या लगातार बढ़ी है।

सरकारी स्कूलों की संख्या में कितनी आई कमी?

शिक्षा मंत्रालय ने लोकसभा में बताया कि केंद्र सरकार अलग से स्कूलों के बंद होने या विलय का रिकॉर्ड नहीं रखती। लेकिन राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों द्वारा UDISE+ पोर्टल पर उपलब्ध कराए गए आंकड़ों के अनुसार सरकारी स्कूलों की संख्या में गिरावट आई है।

आंकड़ों के मुताबिक साल 2021-22 में देश में कुल 10,22,386 सरकारी स्कूल थे, जो 2025-26 तक घटकर 10,05,245 रह गए। यानी चार साल के दौरान करीब 17 हजार सरकारी स्कूल कम हुए हैं।

अगर पिछले एक दशक के आंकड़ों पर नजर डालें तो सरकारी स्कूलों की संख्या में करीब एक लाख की कमी दर्ज की गई है। उत्तर प्रदेश में 2025-26 के दौरान सबसे ज्यादा 1,77,103 सरकारी स्कूल दर्ज किए गए। हालांकि इससे पहले राज्य में स्कूलों के विलय और पुनर्गठन के कारण संख्या में बदलाव देखने को मिला था।

मध्य प्रदेश और उत्तर प्रदेश जैसे राज्यों में स्कूल मर्जर और पुनर्गठन की प्रक्रिया काफी चर्चा में रही है।

सरकार ने स्कूलों के विलय पर क्या कहा?

केंद्र सरकार ने लोकसभा में बताया कि राष्ट्रीय शिक्षा नीति (NEP) 2020 के तहत स्कूलों के एकीकरण की व्यवस्था है, लेकिन यह प्रक्रिया छात्रों की शिक्षा तक पहुंच को प्रभावित किए बिना ही की जा सकती है।

सरकार के अनुसार स्कूलों के विलय के दौरान यह सुनिश्चित करना जरूरी है कि बच्चों को पढ़ाई के लिए ज्यादा दूरी या अन्य परेशानियों का सामना न करना पड़े।

इसके अलावा समग्र शिक्षा योजना के तहत राज्यों को स्कूलों के बुनियादी ढांचे को मजबूत करने, नामांकन बढ़ाने, छात्र-शिक्षक अनुपात बनाए रखने और बच्चों को स्कूलों में बनाए रखने के लिए आर्थिक सहायता दी जाती है। वहीं शिक्षकों की भर्ती और नियुक्ति की जिम्मेदारी राज्य सरकारों के पास होती है।

यूनिवर्सिटी की संख्या में हुई बड़ी बढ़ोतरी

जहां सरकारी स्कूलों की संख्या में कमी आई है, वहीं उच्च शिक्षा संस्थानों की संख्या में तेजी से इजाफा हुआ है। AISHE 2023-24 के अनुसार, साल 2013-14 में देश में 723 विश्वविद्यालय थे, जिनकी संख्या बढ़कर 2023-24 में 1,289 हो गई।

यानी 10 साल में विश्वविद्यालयों की संख्या में करीब 77 फीसदी की बढ़ोतरी दर्ज की गई।

इस वृद्धि में प्राइवेट यूनिवर्सिटी की भूमिका सबसे बड़ी रही। 2013-14 में देश में 219 प्राइवेट यूनिवर्सिटी थीं, जो बढ़कर 540 हो गईं। यानी निजी विश्वविद्यालयों की संख्या में करीब 149 प्रतिशत का इजाफा हुआ।

वहीं सरकारी विश्वविद्यालयों की संख्या भी 504 से बढ़कर 733 हो गई, जो करीब 45 प्रतिशत की वृद्धि है।

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