Lucknow News: डिजिटल अरेस्ट के बड़े खेल का पर्दाफाश, 70 लाख की साइबर ठगी मामले में दो गिरफ्तार
Lucknow News: उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ में साइबर क्राइम पुलिस ने एक अंतरराष्ट्रीय डिजिटल ठगी रैकेट का भंडाफोड़ किया है। पुलिस ने ऐसे गिरोह के 2 शातिर सदस्यों को गिरफ्तार किया है, जो आम नागरिकों के फर्जी दस्तावेजों का गलत इस्तेमाल कर ई-सिम (e-SIM) सक्रिय करते थे और उन्हें विदेश (खासकर कंबोडिया) में बैठे साइबर अपराधियों को सप्लाई कर रहे थे।
7 दिन तक डिजिटल अरेस्ट कर ठगे थे 70 लाख रुपये
जानकीपुरम के सहारा ग्रेस निवासी माधुरी भगत को एटीएस (ATS) पुणे का फर्जी अफसर बनकर साइबर अपराधियों ने कॉल किया। आरोपी ने मनी लॉन्ड्रिंग और अन्य गंभीर अपराधों में फंसाने का डर दिखाकर 16 से 22 जुलाई तक (लगभग 7 दिनों) पीड़िता को वीडियो कॉल पर लगातार ‘डिजिटल अरेस्ट’ रखा। इस खौफ के साए में पीड़िता ने अलग-अलग बैंक खातों और अपनी एफडी तुड़वाकर कुल 70 लाख रुपये चार खातों में ट्रांसफर कर दिए। मामला दर्ज होने के बाद साइबर पुलिस ने त्वरित कार्रवाई करते हुए ठगी की कुल रकम में से 35 लाख रुपये तीन बैंक खातों में फ्रीज करवा दिए हैं।
इस तरह काम करता था ठगी का नेटवर्क
जांच अधिकारी एडीसीपी क्राइम किरण यादव के अनुसार, यह फर्जीवाड़ा तीन स्तरों पर संचालित हो रहा था।
ई-केवाईसी (e-KYC) का दुरुपयोग: गिरफ्तार आरोपी सुमित कुमार रावत (जियो सिम का अधिकृत पॉस एजेंट) दुकान पर आने वाले ग्राहकों का सर्वर डाउन होने का बहाना बनाकर दो बार ई-केवाईसी (e-KYC) कर लेता था। एक सिम ग्राहक को दे दी जाती थी, जबकि उसी दस्तावेज पर एयरटेल की दूसरी सिम गुप्त रूप से चालू कर ली जाती थी।
एयरटेल की ब्लैंक सिम का खेल: सुमित को एयरटेल सर्विस प्रोवाइडर ईशु यादव के जरिए करीब 100 ब्लैंक सिम उपलब्ध कराई गई थीं, जिनका अवैध इस्तेमाल होता था।
ई-सिम में बदलाव व क्रिप्टोकरेंसी में डील: सुमित उस फर्जी सिम का क्यूआर कोड (e-SIM Activation QR Code) मुख्य सरगना प्रवीण श्रीवास्तव को 325 रुपये में बेच देता था। प्रवीण उस सिम को ई-सिम (e-SIM) प्रोफाइल में बदलकर टेलीग्राम (Telegram) के जरिए कंबोडियाई साइबर अपराधियों को 50 USDT (क्रिप्टोकरेंसी) प्रति सिम के हिसाब से बेच देता था।
कंबोडिया से भारत में ठगी: विदेशी ठग भारत के इन ई-सिम नंबरों का उपयोग करके भारतीय नागरिकों को ‘डिजिटल अरेस्ट’, ‘इन्वेस्टमेंट फ्रॉड’ और ‘ओटीपी स्कैम’ का शिकार बनाते थे, ताकि भारतीय जांच एजेंसियां लोकेशन ट्रेस न कर सकें।

गरीब व्यक्ति के नाम पर दर्ज था कॉल करने वाला नंबर
टेक्निकल जांच के दौरान पुलिस ने पीड़ित को आई पहली कॉल के नंबर को ट्रेस किया, तो वह लखनऊ के एक पॉस सेंटर से जारी हुआ मिला। जब सिम धारक का सत्यापन किया गया, तो वह बेहद गरीब निकला, जिसे यह भी नहीं पता था कि उसके नाम पर जारी सिम का उपयोग किसी अंतरराष्ट्रीय अपराध में हो रहा है। इसके बाद सिम विक्रेता सुमित को हिरासत में लिया गया, जिससे पूरे गिरोह का भंडाफोड़ हुआ।
गिरफ्तार आरोपी में मुख्य मास्टरमाइंड प्रवीण श्रीवास्तव उर्फ अमित निवासी राजाजीपुरम, सुमित कुमार रावत निवासी देवपुर, राजाजीपुरम, लखनऊ शामिल हैं। आरोपियों के पास से 3 स्मार्ट मोबाइल फोन, 105 सिम पैकेट व 05 खुले लिफाफे, क्रिप्टोकरेंसी वॉलेट, टेलीग्राम चैट्स और फर्जी ई-सिम के डिजिटल साक्ष्य मिले हैं।

