ट्रम्प के नए टैरिफ के खिलाफ अमेरिका के 25 राज्यों ने खोला मोर्चा, यूएस कोर्ट ऑफ इंटरनेशनल ट्रेड में केस दर्ज
Sandesh Wahak Digital Desk: अमरीका में राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प द्वारा 60 व्यापारिक साझीदार देशों के उत्पादों पर लगाए गए भारी टैरिफ (आयात शुल्क) के खिलाफ विरोध तेज हो गया है। देश के 25 राज्यों के एक विशाल गठबंधन ने ट्रम्प प्रशासन के इस कदम को चुनौती देते हुए यूएस कोर्ट ऑफ इंटरनेशनल ट्रेड में मुकदमा दायर किया है। याचिका में आरोप लगाया गया है कि राष्ट्रपति ने अपने कानूनी अधिकारों का दुरुपयोग करते हुए नए शुल्क लागू किए हैं।
अमरीकी आयात का 99% हिस्सा प्रभावित
अदालती दस्तावेजों के अनुसार, प्रभावित देशों से अमरीका आने वाले अधिकांश सामानों पर 10 प्रतिशत से लेकर 12.5 प्रतिशत तक का अतिरिक्त शुल्क थोप दिया गया है। याचिकाकर्ता राज्यों का कहना है कि ये 60 देश मिलकर अमरीका के कुल आयात का लगभग 99.4 फीसदी हिस्सा संभालते हैं। अंतरराष्ट्रीय समाचार एजेंसी सिन्हुआ के मुताबिक, राज्यों का यह गठबंधन अदालत से मांग कर रहा है कि इन गैर-कानूनी शुल्कों पर तुरंत रोक लगाई जाए और कंपनियों द्वारा अब तक वसूली गई ड्यूटी को वापस (रिफंड) करने का आदेश जारी हो।
ट्रेड एक्ट के गलत इस्तेमाल का आरोप
कानूनी याचिका में कहा गया है कि सर्वोच्च न्यायालय द्वारा फरवरी में ट्रम्प की पुरानी टैरिफ नीति को खारिज किए जाने के बाद, प्रशासन अब 1974 के ट्रेड एक्ट के सेक्शन 301 और जबरन मजदूरी की धाराओं की आड़ ले रहा है। राज्यों का तर्क है कि प्रशासन इन्हीं बहानों के जरिए पुराने वैश्विक शुल्कों को नए सिरे से लागू करने की कोशिश कर रहा है।
कैथी होचुल (गवर्नर, न्यूयॉर्क): राष्ट्रपति ट्रम्प के यह गैर-कानूनी टैरिफ आम मेहनतकश परिवारों की जेब पर सीधा डाका हैं। इससे राशन, घरेलू सामान, निर्माण सामग्री और रोजमर्रा की जरूरत की चीजें महंगी हो जाएंगी।
डैन रेफील्ड (अटॉर्नी जनरल, ओरेगन): हम ट्रम्प की इस मनमानी के खिलाफ तीसरा मुकदमा दर्ज करा रहे हैं। राष्ट्रपति एक बार फिर अमरीकी परिवारों और छोटे व्यापारियों पर आर्थिक बोझ बढ़ा रहे हैं, जिसे रोकने के लिए राज्यों का गठबंधन एकजुट है।
लेटिटिया जेम्स (अटॉर्नी जनरल, न्यूयॉर्क): सुप्रीम कोर्ट से झटका खाने के बाद भी सरकार पिछले दरवाजे से जनता पर टैक्स बढ़ाने का असंवैधानिक प्रयास कर रही है।
व्हाइट हाउस ने खारिज किए आरोप
मामले पर प्रतिक्रिया देते हुए व्हाइट हाउस ने राज्यों के दावों को सिरे से खारिज कर दिया। प्रशासन ने कहा कि ट्रेड एक्ट का सेक्शन 301 कानूनी रूप से पूरी तरह वैध और प्रभावी हथियार है, जिसका इस्तेमाल राष्ट्रपति के पिछले कार्यकाल में भी सफलता से किया गया था।
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